Thursday, May 19, 2011

मैं....

१.
तुमको पा
न खोया खुद को
तुम्हे खोकर भी
न मिला मैं मुझको !

खुद को , तुमको
सब ही खो दिया मैंने!

२.
रंगहीन है
प्रकाश.

स्याह या सफ़ेद
है
न होना या होना इसका

मैं
नहीं प्रिज्म
रंग नहीं मेरा जीवन

३.

खड़ा होना
दो पैरो पर
मेरा मनुष्य / करता विकास
चलना सीधे सीधे
खड़ा रहना सीधे सीधे
इसी बिंदु पर फ्रीज़ हूँ
मैं !
मैं बन चूका / इतिहास
विकास में बहुत पीछे.



1 comment:

  1. This one is gud...bt thoda aur saral banaane ki koshish ki jaa sakti hai..

    ReplyDelete

मसीहा

१. कमाल है कि  तुम गंध नहीं पा रहे देख रहा हूं मैं  सड़ गया फ्यूचर। २. कमाल है कि  मसीहा तुम्हारा अब भी सुन रहा हूं मैं उसकी गालियां भद्दी। ३...