1.
रिंग में मास्टर, बाहर शेर
नए तमाशे ऐसे ही,
नकली मास्टर नकली शेर .
2.
बहुत तेज़ हवा है
आँचल बेहतर होता,
घर का दिया न बुझे, खुद के सैलाब में.
3.
आप वाकिफ हैं, है हमें भी पता
जश्न में जले हैं
अपने ही आशियाने भी .
१. कमाल है कि तुम गंध नहीं पा रहे देख रहा हूं मैं सड़ गया फ्यूचर। २. कमाल है कि मसीहा तुम्हारा अब भी सुन रहा हूं मैं उसकी गालियां भद्दी। ३...