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Sunday, September 26, 2021

विषय- हिंदी-भाषा, पाठ-२ - विपरीत शब्द-युग्म

कक्षा - ०२, विषय- हिंदी-भाषा, पाठ-२ - विपरीत शब्द-युग्म 

१. सार्थक - निरर्थक

पुरानी किताब: सार्थक क्रिया, निरर्थक प्रयास। 

नई किताब: सार्थक जीत, निरर्थक विपक्ष।  

२. अर्थ-अनर्थ

पुरानी किताब: झाँसना - अर्थ, वैर-अनर्थ। 

नई किताब: जीत- अर्थ, हार- अनर्थ।  

३. उपयोगी -अनुपयोगी

पुरानी किताब: रामधुन उपयोगी, गांधी अनुपयोगी ।

नई किताब: दंगा उपयोगी, संविधान अनुपयोगी। 


 


Sunday, September 19, 2021

भाषा

एक भाषा

क्या होगा उसका जो ढोती है केवल झूठ.

याद रखी जायेगी, एक विलुप्त झूठी नदी की तरह 

या 

बहती रहेगी, ढोती हुई लोकतंत्र का सच 

मसीहा की जयकार 

संस्थाओं की लाश।  

बहती रहेगी क्या तब भी जब आडम्बर नहीं होंगे 

नहीं होंगे पंचसाला चुनाव। 

जब झूठ नहीं होगा फ़र्क़ सच से,

क्या ज़रुरत होगी भाषा की।   

Thursday, June 10, 2021

सर पर ताज हो

सर पर ताज हो 

मन भर आनाज हो 

काम नहीं काज हो 

साहेब सा  राज हो। 


चार चापलूस हों 

हज़ार जासूस हों 

कोटि कोटि भक्त हों 

बोटी हो रक्त हो 

कभी नहीं हार हो 

जय हो जयकार हो।  


नंगा हो भूका  हो  

मोटा हो सूखा हो 

शुन्य प्रतिकार हो 

अपनी सरकार हो।  






Tuesday, February 16, 2021

महान राष्ट्र यूं जन्म ले रहा है

अंधे कवियों ने लिखी महान कविताएं 

बहरे बीथोवेन ने सिम्फनी 

कटे पैर लोग चढ़ जाते हैं पहाड़।


नागरिक चाहते हैं

राष्ट्र भक्त होना। 

चाहते हैं,

न बदले कुछ भी  

रटे हैं, विकल्पहीनता।


महान राष्ट्र यूं जन्म ले रहा है।   

 

Saturday, February 13, 2021

तमाशा 

गुजर रहे वक़्त का नाम है, तमाशा।

गटर 

सार्वजनिक जीवन है, गटर। 

खेल 

तमाम रियाया संग हो रहा है, खेल। 

जेल 

बिना चहारदीवारी बिन दरवाज़ा जहालत की खुली जेल। 

नेता 

कौन ?

देश 

बेहतर है मौन। 



Sunday, January 17, 2021

वह दिन भी आएगा

 1. 

सुनाई देगी फिर आवाज़ 

छिप गई है जो,

तर्क की, संवाद की, जन की, जनतंत्र की। 


२. 

उम्मीद अच्छी चीज़ है 

मानना कि, दिन है तो रात भी 

उम्मीद रखना कि, बदलेगा वह या निज़ाम उसका। 


३. 

समय की पांत में 

वह दिन भी आएगा, नहीं होंगे वह 

छल्लों पर छल्ले बनते जाएंगे और उनकी दी चोट भी न पहचान में आएगी। 

Thursday, August 6, 2020

तुम, तारणहार हो
स्वर्ग का द्वार हो 
धरती से छूटा नेह 
जदपि तुम निर्जल मेह 
तुझको सर्वस्व अर्पण 
धूम धाम से तर्पण  
रोज़गार दो या भूसी-चारा 
खोलूं मुंह जो, दो कारा
गाँव तेरे शहर तेरा 
नाम तेरा पुण्य मेरा 
तेरे  ही अखबार सारे 
तू ही बाज़ार तारे
भूख हो अकाल हो 
तेरा मायाजाल हो 
तेरी जय-जयकार है
ताज़ा माल डकार है 
तेरी मूंछें तेरी दाढ़ी 
मेरी मूर्छा नित् बाढ़ी
कीचण गुलाब है 
तेरा इक़बाल है 
दी हमें पहचान है 
झूठ नया ईमान है 
भुकमरी का नेवता है
तू हमारा देवता है
झूठ है फरेब है 
हिंसा, अतिरेक है 
तू कहे तो सब चंगा 
तू कठौती तू ही गंगा
वाद न संवाद है 
तेरा आशीर्वाद है।     
   
 
  

Wednesday, August 5, 2020

0५. ०८. २०२० 

अज्ञेय शांति या शून्य व्याप जाता है
ऐसे मौकों पर, 
जब दिल टूटता है और आवाज़ नहीं आती 
वक़्त के कूड़ेदान में फेंक खुद को 
छोड़ देते हैं हम 
उम्मीद। 
उम्मीद, लड़ पाने की 
उम्मीद, टिक पाने की 
जब टूट जाती है 
तभी उठ बैठो। 
कराहो, पुकारो, दो बद्दुआएं या मांगो कोई मन्नत। 

कर नहीं सकते तो, बोलो 
नहीं बोल सकते तो, लिखो 
कुछ नहीं कर सकने जैसा कुछ नहीं 
सर पटको 
उपवास करो 
चलो पैदल या दौड़ो। 

कुछ नहीं करने से तुम्हारी मौत भी रहेगी मुर्दा 
हो ज़िन्दा जब तक
करो कुछ। 


Monday, April 22, 2019

१.
बंद आँखों सुना, किया नमस्ते
कहा, भारत माता की जय
पी चाय, मारा सुट्टा और फिक्रमंद हुआ अन्धो को लेकर
खरीद ली छड़ी,
जादुई चश्मा।  देखने लगा हरियाली।
आँखे रखी बंद
उड़ती रेत, पड़ न जाए आँखों में।

२.

अंधा बना रहा मैं
फोड़ता रहा जब वो आँखे
यही चतुराई थी।

३.

चतुर बना रहा मैं,
छलता चला गया वह।

 ४.

जादुई चश्मे से देखता हूँ सपना।

५.

ज़िंदा हूँ अभी। 

Sunday, April 21, 2019

तुम हो,
और राजा है।
2
दिखता नहीं मैं,
न तुमको न राजा को।
3
अकालग्रस्त हूँ मैं
न भूलूंगा पर तुम्हे, न बख्सुङ्गा राजा को।
4
प्यार मिले तुमको, आह राजा को।
5
जाता हूँ अब।

Tuesday, April 9, 2019

चुप रहो, बच निकलो।

घुप अंधेरा।
गहन मौन।
एक लंबी रात का रात का सफर है
एक मदारी है
एक जम्हूरा
तमाशबीन कौम है।
चुप रहो,
बच निकलो।

तू मालिक है, भेड़ हैं हम.

जादू है,
तेरा व्यंग, तेरी मुस्कान
तेरा सोना, तेरा रोना
तू मालिक है
भेड़ हैं हम। तेरे जादूई दुनिया की भेड़े।
भेड़ हैं हम, तेरे बाड़े में चरती
तेरी संगत में भेड़िया धसान करती।।

Saturday, May 17, 2014

कोई शीर्षक नहीं

1.

रिंग में मास्टर, बाहर शेर 
नए तमाशे ऐसे ही,
नकली मास्टर नकली शेर .

2.

बहुत तेज़ हवा है
आँचल बेहतर होता,
घर का दिया न बुझे, खुद के सैलाब में.

3.

आप वाकिफ हैं, है हमें भी पता 
जश्न में जले हैं 
अपने ही आशियाने भी .




Thursday, May 15, 2014

सोलह मई से एक दिन पहले

१. 

बड़ी अदा से,
बदल गए खुद को। 
तस्वीर मगर बासी ही लगा रखी है। 

२. 

तुम हो, फिर बीबी बच्चे तुम्हारे 
हमारे दिल पर 
हक़ तुम्हारा, खुला या छिपा। 

३. 

दो दिन,
भरम बनाए रखना। 
रोजी रोटी में लग जाऊँगा, दो दिन बाद। 




Friday, September 13, 2013

जनतंत्र घरानों से परे..........


१.

जब भी,
बढ़ जाता है, मेरा रक्तचाप 
माफ़ी मांगने लगते हैं, नेहरु। 
काश,
वही एक गलती न करते आप 
काश,
जनतंत्र पनपता, घरानों से परे।

२. 
  कभी,
नज़र पड़ जाती है, मेरी 
शुक्रिया अदा कर देता हूँ। 
लंगड़ा हुआ, पर 
जिंदा है, मेरे देश में 
अभी भी, राज़ वोटों का। 






Wednesday, August 14, 2013

मेरी, उमर का ही हो गया है देश..

१. 

आज, 
बेतरह याद आती है 
जलेबी।
अगस्त पंद्रह और जलेबी 
एक ही थे 
बचपन में। 

देश,
भी अब जलेबी लगता। 
समझने में कठिन 
प्रिय पर, मेरा। 

२. 

मेरी,
उमर का ही हो गया है देश। 
पता है,
दिन अच्छे बीत गये। 

३. 

सरेंडर,
कर दिया है 
देश मेरे,
मैंने भी। 



Tuesday, October 20, 2009

loktantra

एक राजा था
एक रानी थी.

राजा से राजे हुए
बढ़ी वंश की बेल
बेलो पर छितरा गए
 हम जन सकल सकेल.

एक राजा था
एक रानी थी
राज पाट मनमाना था
जमी धौंश मनमानी थी

राजा बढा, बढ़ गयी रानी
भारत भर अब भरता पानी

राजा से राजे हुए
जनतंत्र लाया तेल
बांध के गठरी निज अस्मत की
हम है रहे धकेल.

बोलो भारत माता की जय
बोलो जवाहर लाल  की जय

१. पूछो राम  कब करेगा  यह कुछ काम । २. कर दे सबको  रामम राम  सत्य हो जाए राम का नाम  उसके पहले बोलो इसको  कर दे यह कुछ काम का काम । ३. इतना ...