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Saturday, February 6, 2021

कहीं नहीं गए हम, 

न नर्क न स्वर्ग 

कहीं नहीं गए हम, 

मर गए और खो गए। 


2.

तकरीबन न के बराबर ख़ुशी 

बिलकुल नहीं दुःख, 

न अच्छा न बुरा 

मौत में कुछ तो ख़ास नहीं। 


3.

ध्वनि, वर्णमाला से परे 

भाव, जिनका नहीं कोई चित्र 

रंग नहीं, बेरंग नहीं , न बोला न रहे चुप 

मर गए, तुमको खबर नहीं।   

Saturday, April 13, 2019

कई रात बाद लौटा,
कई दिन विलुप्त हो गए
लौटा तो साथ पंजर था, मुझ-सा, मुझसे बड़ा ही किंचित।
साथ मेरे, था मुझ-सा कुछ मरा हुआ सा।

समझ नहीं आता नहीं
मरा मैं लौटा या मौत, ही लौट आया है मेरे बदले

दिन है या रात
समझ नहीं आता।

Sunday, August 10, 2014

न कह सका अपनी, न सुना तेरी

न कह सका अपनी, न सुना तेरी
ज़िन्दगी, हम रह गये अपरिचित ही।

साथ होने से ही, हैं हम दोनों
अजीब है नहीं, हमारा होना ही।

चन्द सांसें दी हैं तुमने मुझको
एक तुमको मिला मुझसे, मायना ही।

नहीं साम्य कहीं, मध्य हम दोनों
तुम घटते गए, मैं बढ़ा ही। 












Tuesday, July 22, 2014

अशेष नहीं, समय भी....

१.

अशेष नहीं, समय भी।  
ख़त्म हो,
वक़्त भी।

२.

न  पहले कुछ। 
न  बाद कुछ
मुझ तक, सिमटा समय।

३.

घूम फिर वहीं लौटे। 
नहीं कुछ और 
ज़िन्दगी का मक़सद, ज़िन्दगी।  






Sunday, September 29, 2013

इंतज़ार रहता है,

१. 

छुपा रह जाता है,
ख़त्म नहीं होता 
दर्द। 

२. 

नकली है, जीने की ललक 
इंतज़ार रहता है,
मौत तेरा। 

३. 

हम भी वाकिफ हैं 
तू भी तलबगार 
मिलेंगे शान से।  

Thursday, September 26, 2013

मौत होती रहती उम्र भर

१.

धडकन रुकती ही,
किसी एक पल 
मौत होती रहती उम्र भर

२.

मकसद नहीं, बेटी है ज़िन्दगी
मौत, नहीं इतनी भी उलझी।
सुलझी नहीं, भी ज़िन्दगी।

३.

हंसते हुए मिल सबसे
या चुपचाप अकेले
दिन अंतिम, कुछ सोचा नहीं अब तक।

४.

करीबी, सोचने नहीं देती।
मौत,
नहीं गलती मेरी, भूल जाता अक्सर तुझको।

५.

पता है,
चंद सिसकियाँ होंगी, होंगे चंद अफ़साने
मज़ा है, मरने में भी।

Tuesday, September 24, 2013

उदार हूँ, मौत तुझसे

१. 

मौत नहीं है
खुद, चुन न पाना साँसों का मतलब। 
मौत नहीं है 
देख, नहीं पाना ख्वाब कोई या ले पाना एक झपकी। 
मौत नहीं है 
सज जाना कब्रों की कतार में, बन एक शानदार मज़ार।  
 
मौत नहीं है, ये कविता। 

२. 

उदार हूँ, मौत तुझसे। 
उम्मीद नहीं, 
उदारता की तुमसे। 

३. 

अकेलापन, भी नहीं है मौत। 

Friday, September 13, 2013

१.

कब मानोगे मरा
धड़कन रुके, मस्तिष्क ठप
या, पुतलियाँ हो ठंडी।
क्या कहोगे,
मर गयी हो चाह,
मरने की भी।

२.

बड़ा सवाल लेकिन
कब मानोगे जिंदा।

३.

सवाल है कि, ज़िन्दगी मौत से परे क्या।

४.

उलझन मेरी,
ज़िन्दगी बिना, मौत क्या संभव। 

Monday, November 5, 2012

तुम हो गए, मुक्त


तुम हो गए,
मुक्त 
भूल कर, मुझको 

बस साथ चलता रहा, 
मैं।

मुआफ़ न किया;
न भुला तुमको।

2.

हर हंसी बाद,
पैठी गहरी उदासी,
मौत आती है, आहिस्ता आहिस्ता 

3.


मुझे  याद नहीं,
मेरी इच्छाएं,
न पहली न आखिरी कोई,
मर गया क्या 
सचमुच मैं।   
 
4.

मेरा अंत, 
बता दो मुझको।

पता चले 
क्या अंत तक सहा तुमने, मुझको।

Tuesday, August 2, 2011

मरने का फ़ायदा

मरने का 
फ़ायदा 
बड़ा सबसे,
मरना पड़ता नहीं,
फिर से.
जिंदगी - ज़हालत 
फिर फिर 

Wednesday, July 20, 2011

मैं चाहता हूँ,

एक 
काम सलीके से हो.

मैं चाहता हूँ,
प्लानिंग करके 
मरुँ ,

मर गया अचानक 
मुमकिन है,
सपनें मेरी आँखों में रह जाएं 
और 
आग बहती रहे नसों में मेरे,

बिना प्लानिंग 
मर गया गर,
डर है
रह जाऊं यहीं 

प्रेत सताए 
तुम्हे रह रह .

Monday, July 4, 2011

कब्र की पनाह/ तुम

क्षितिज , आसमां, धरती 
सब कठोर 
सब छाया 
अतीत के,

पीता हूँ साँसे 
खाता हूँ जिंदगी
कुरेदता हूँ 
सपनों की कतार
चबा रहा हूँ 
खुद को

सबको ढके सबको तोपे
एक आवाज़ 
एक छाया 

कोई नहीं यहाँ
कब्र की पनाह 
तुम   

Sunday, June 26, 2011

क्या बचता है अचानक 
भरभरा कर गिर जाने के बाद 
क्या इतना कुछ, 
समझ में आये नहीं 
ताउम्र 
जीते हुए एक पल का कम्पन. 

क्या बचता है 
मृत्यु पश्चात 
क्या इतना कुछ,
ज़िन्दगी बाकी 
घुट घुट नापे लम्हों को.

क्या बचता है 
तुम्हारे जाने के बाद. 

Saturday, June 25, 2011

याकि / मेरी मौत से ही यारी है .

बीत रहा  हूँ मैं 
रचा जा रहा है समय.

नहीं पता अब तक 
मैं मौत के आगे 
भागता,बचता हुआ
याकि 
मौत  इंतज़ार में आगे कहीं बैठी हुई .

रुक जाऊं 
दबोच न ले आ पीछे से 
भागता मैं 
न बाँध लूँ जा आगोश के घेरे.

मौत मुझको लिए फिरता है 
इस जीवन 
याकि 
मेरी मौत से ही यारी है
.


१. पूछो राम  कब करेगा  यह कुछ काम । २. कर दे सबको  रामम राम  सत्य हो जाए राम का नाम  उसके पहले बोलो इसको  कर दे यह कुछ काम का काम । ३. इतना ...