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Friday, July 22, 2011

मुंबई का धुआं


दो बार

कभी ज्यादा भी,
तलाशी लेने देता हूँ.

डर 
हर वक़्त बना रहता है,
खौफ 
चुभता है.

 कमजोर, मेरी आँखों को 
ज़रा तेज़ लगता है  
मुंबई का धुआं,

Wednesday, July 20, 2011

बम कितना बड़ा रहा होगा .

प्लास्टिक से ढँक
छिपाया था
और कहीं 
स्कूटर की डिग्गी,

बम 
कितना बड़ा रहा होगा .

अब तक उन्नीस मौतों 
और दर्ज़नों घायल के ?

जब नापोगे 
बम की ताकत 
तहकीकात करने को,
जोड़ दोगे क्या 
वो रातें 
बिना सोये जो मैंने काटी .

Thursday, July 14, 2011

मुंबई


चिकोटा
मसल कर देखा 
कुरेदता रहा चमड़ी 
नाख़ून उखाड़े 
फिर 
सड़क पर सर दे मारा

हर कोशिस की 
पुरजोर जार रोने की 

मुंबई 
मुझको रो लेने देती

एक हिजड़ा क्रोध 
लंगड़ी हिंसा 
लहू में बहती रही

धुआं धुआं रोष पी 
मैनें 
फिर आज मज़े में रोटी खाई..

मुंबई 
माफ़ करना 
मेरी कायरता को... 

मसीहा

१. कमाल है कि  तुम गंध नहीं पा रहे देख रहा हूं मैं  सड़ गया फ्यूचर। २. कमाल है कि  मसीहा तुम्हारा अब भी सुन रहा हूं मैं उसकी गालियां भद्दी। ३...