कितना जानें
कितना मानें
ख़ुद को कितना पहचानें ।
कहाँ रेफ है
सेफ़ कहाँ है
बीता कितना
बचा कहाँ है
कितना कच्चा-सड़ा हुआ है
मौत मौत है
जीवन जीवन
युगल मध्य क्यूँ खड़ा हुआ है
मेरा मुझ तक पहुँच ना पाता
शैडो इतना बढ़ा हुआ है।
सौ अरब की अलग जाति के
भिन्न, एक-से जीव बने जो
एक धरा पर, एक रेख में, मरे हुए हैं
ज़िंदा हैं जो, मर जायेंगे
मरे हुए भी पड़े हुए हैं
फिर क्यूँ मैं हूँ
कब तक हूँ मैं
मेरे सीने में आकर यूँ
यह सवाल क्यूँ गड़े हुए हैं।
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