Saturday, January 1, 2022

तंत्र से जन घोंट कर बना वह ईसा है

बहुत लम्बे कान हैं, 

सुनते नहीं कुछ साजिश सिवा  

नुकीली लम्बी नाक है, 

सूंघते हैं साजिश 

आंखों से अँधा है  

अंधा तो अंधा है।  

नेता है गंदा है। 

चाक मध्य पीसा है 

जनता का कीसा है।  

पर 

पूज्य है, पूजनीय है 

महा है, महनीय है 

तंत्र से जन घोंट कर 

बना वह ईसा है 

अपना 

मसीहा है। 



मसीहा

१. कमाल है कि  तुम गंध नहीं पा रहे देख रहा हूं मैं  सड़ गया फ्यूचर। २. कमाल है कि  मसीहा तुम्हारा अब भी सुन रहा हूं मैं उसकी गालियां भद्दी। ३...