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Saturday, January 30, 2021

रहने दो हमको अपनी ही फुर्सत में

1. 

साधारण रह जाना,

परिचित बरामदों में रह जाना अनचिह्ना 

साधारण बात है 

और साधारण बातों की की तरह ही,

सहज। 


2. 

चकाचौंध की रौशनी पराई है, 

प्रसिद्धि की, सफलता की 

और  हम रह जाते चाँदनी की छाया में श्वेत वस्त्र भूतों से। 

कृत्रिम निर्मितियों की के प्रेत द्वार 

क्या ही ज़रूरी हैं। 


3. 

पहाड़ में पहाड़ी से, मैदान में मैदानी 

वंचित महत्त्व से, अर्थ की आभा से 

रहने दो हमको 

अपनी ही फुर्सत में। 



Tuesday, April 9, 2019

चाँद आज़ाद हो जाता है।

1.
कटोरे भर हंसी तेरी,
चुम लेता हूँ
चाँद आज़ाद हो जाता है।
भर आती है रौशनी
स्याह ज़िन्दगी के कोठरों में।
2.
औंधे पारिजात पर रख पाँव,
अलसुबह छोड़ जाती हो
रात खत्म नहीं होती।
मर जाता है दिन
स्थिर हो जाती है, ज़िन्दगी की डेवढ़ी।

Thursday, November 29, 2012

तुम्हारा साथ होना


1.

 तुम्हारा साथ होना,
 धुप का धीमा हो जाना है।
 हो जाना है, जंगल को सुन्दर।

2.

तुम्हारा साथ होना,
नींद का पूरा हो जाना है।
हो जाना है, पूर्ण ख़्वाबों का।

3.

तुम्हारा साथ होना है,
नीम बौर में खुशबू का आना है।
हो जाना है, रात चाँद को मनचला।       
 

Wednesday, June 22, 2011

मेरी आह, दूर तलक करती है शोर .

तुम्हारी खातिर....
तुम्हारे मौन की खातिर,
  
फैसला किया मैंने... 
खामोश हो जाने का 
खामोश हो जाने का , सदा ही चुप जाने को. 

फैसला चुप हो जाने का
तोड़ कर स्वप्न, तोड़ आकांक्षाएं सारी
तोड़ देता  है
मुझको  को भी .

खामोश मै हो जाता हूँ 
मेरी आह, 
दूर तलक करती है शोर .

Wednesday, March 10, 2010

man nahi manata-----

                                                              ३.

मन नहीं मानता
तुम सिमटी हो ख्वाबो तक केवल
ख्वाबो  से परे तुम कुछ भी नहीं

मन नहीं मानता
प्रेम स्वप्न मात्र है

मन चाहता है
तुम आ मिलो
तुम्हारे संग जोडू मै जीवन धागे.
                                               ४.

मन नहीं मानता

अंत है वाक्य का पूर्ण विराम
शब्द  खो देते है अर्थ
वाक्य का भी अंत है.

मन चाहता है
मूक अर्थ भी प्रेषित हो
न शब्दों  न वाक्यों पर रुके कहना
संवाद रहे बिन भाषा भी.

Wednesday, January 20, 2010

तुम हो तो यंकी आता है
कि
धरती है अभी
आसमा भी है

      तुम्हारे होने पर
      टिका है झरने का बहना
      कली चटकन का शोर
      भोर ओस का गीलापन

तुम हो तो मन  मानता है
रमा रहना
शिद्दत से जमा रहना
मन का मानना  कि
अकेला नहीं हु मै

         तुम रहना इर्द गिर्द
         कि सांसे टिकी रहती है अपनी जगह
         सांसो को टिके रहने दो अपने इर्द गिर्द

        



    

Thursday, November 26, 2009

man nahi manata .

 मन नहीं मानता
कि ब्रह्माण्ड से परे सिफर केवल
सिफर से भी परे सिफर केवल
 मन नहीं मानता
सिफर पर जा कर रुकती होगी दुनिया
मन चाहता है
जीवन के अंत से भी जीवन ही सुरु हो.

         २
मन नहीं मानता
भुलावा है सारा जीवन
स्नेह, प्रेम सौहार्द्य भी विलीन हो जाते है
मन नहीं मानता
एकांत में ही ब्याप्त है सारी माया
मन चाहता है
जिवानानुकुल  कोलाहल ही मूल्य हो जीवन का.

Sunday, October 11, 2009

mai tumhe chahata hu:- 3.

मै चलता रहा हूँ
मै कहता रहा हूँ

मेरे चलने से बोझिल हो गयी धरती
मेरे कहने से बासी हो गया दिन

मै चाहता हूँ रहू हल्का
मै चाहता हूँ रहू  ताज़ा

मै तुम्हे चाहता हूँ

mai tumhe chahata hu:- 2.

तुम हरीतिमा लाती हो दूब की
तुम आद्रता लाती हो ओस की
तुम लाती हो ख्वाबो की रेल
तुम लाती हो गुनगुनी नींद

मै घास पर सो जाना चाहता हूँ
 मै ओस कणों से भीग जाना चाहता हूँ
मै नींद भरा ख्वाब चाहता हूँ
मै तुम्हे  चाहता हूँ

mai tumhe chahata hu:- 1.

तुम्हारे लिए टूट पड़ता है सागर
किनारे विलीन हो जाते है अक्सर
रेत ही रेत पर बांधता मै मंसूबे
मंसूबो  की खातिर तुम्हे चाहता हूँ

१. पूछो राम  कब करेगा  यह कुछ काम । २. कर दे सबको  रामम राम  सत्य हो जाए राम का नाम  उसके पहले बोलो इसको  कर दे यह कुछ काम का काम । ३. इतना ...