१.
दिन ढला
पुनः पुनः
शाम से रात ही, समय का सफर।
२.
इंतज़ार
पुनः इंतज़ार
तुमसे मिलना ही, एकमेव ख्वाहिश।
३.
छपाक छपाक
उम्मीदों का सफर
तैरता मैं अंतहीन।
१. कमाल है कि तुम गंध नहीं पा रहे देख रहा हूं मैं सड़ गया फ्यूचर। २. कमाल है कि मसीहा तुम्हारा अब भी सुन रहा हूं मैं उसकी गालियां भद्दी। ३...