अनायास मुस्कान
तीव्र प्रेय आकांक्षा
कभी
स्नायु दबाव
आस पास रही हो तुम
बिना कॉमा लिखी गई कविता
पूर्ण विराम पाती तुम पर.
2.
तुम
सर्वनाम हो
विस्थापित करती मेरी संज्ञा को.
3.
मेरी महत्ता
तुम विशेषण.
1.
उदासी के उदास ख्यालों संग
ज़िन्दगी चुप गा रही होती है मौत की धीमी धुन
और जब, व्यर्थ बीत जाने का गीत लिख रहा होता है
मुझे
आ जाती हो,
तुम।
2.
हर बार नई एक शाख पनपती है
रोशनी फैलती है आहिस्ता
तुम पसरती हो, मेरे होने में
हर बार, एक अकेलापन चला आता है
उजास ज़िन्दगी का, जम जाता है
शैल बर्फ बेरंगा, बस हासिल।
१. पूछो राम कब करेगा यह कुछ काम । २. कर दे सबको रामम राम सत्य हो जाए राम का नाम उसके पहले बोलो इसको कर दे यह कुछ काम का काम । ३. इतना ...