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Thursday, September 23, 2021

अनायास मुस्कान

तीव्र प्रेय आकांक्षा 

कभी 

स्नायु दबाव

आस पास रही हो तुम

बिना कॉमा लिखी गई कविता 

पूर्ण विराम पाती तुम पर.


2.

तुम 

सर्वनाम हो

विस्थापित करती मेरी संज्ञा को.


3.

मेरी महत्ता

तुम विशेषण. 


Monday, January 25, 2021

1.

उदासी के उदास ख्यालों संग 

ज़िन्दगी चुप गा रही होती है मौत की धीमी धुन 

और जब, व्यर्थ बीत जाने का गीत लिख रहा होता है 

मुझे 

आ जाती हो,

तुम। 


2. 

हर बार नई एक शाख पनपती है 

रोशनी फैलती है आहिस्ता 

तुम पसरती हो, मेरे होने में 

हर बार, एक अकेलापन चला आता है 

उजास ज़िन्दगी का, जम जाता है 

शैल बर्फ बेरंगा, बस हासिल। 



 

Sunday, August 2, 2020

तुम निबाह देती हो।

स्वीकार भाव में हिला देती हो सर,
कि नहीं कोई देव जो दिखता नहीं
और मन ही मन देव से मांग रही होती हो
सर्व शक्तिमानके नाराज़ न होने की मन्नत।
छिपा देती हो अखबार से काट
सहेजी नायक की कटिंग,
ख्वाब में अब भी जो मंडराता है।

सुन लेती हो मसीहा के लिए
तमाम कड़वे शब्द, 
मसीहा, जिसका होना ही है लोकतन्त्र।

तमाम किस्से हैं
तमाम बातें है
जिनसे निभा देती हो,
तुम
मोहब्बत मेरे लिए।

Friday, July 31, 2020

नींद से बोझिल पलकों को
रोके रखना,
मूंदते ही जिनके ख्वाब तैर उठें,
साथ पसर जाए सरगम।
पलकों को रोक
पढ़ना नाम एक बार फिर,
इस तरह,
तुम जवाब देती हो।
2.
सवाल ज़िन्दगी करती है,
बिना थके बिना रुके,
मैं चुप
तुम जवाब देती हो।
3.
तुम्हारे जब सवाल उठते हैं,
ज़िन्दगी रह जाती है मौन।

Thursday, July 30, 2020

 बार बार दूर तक दिखता है पानी
नदी फैल गई हो
या
सागर निकल आया हो बाहर।

अंत आता सा लगता है अपना
फिर दिखने लगता है
मस्तूल एक नाव का।

क्या तुम भी हो
लपेटे एक सफेदी
यह पूछते,
मोगरे की खुश्बू फैल जाती है।

क्या पास ही हो तुम।
1.
नदी की लहर पर,
सागर पर,
तैरता, एक चुम्बन पहुंचे तुम तक।

तमाम उम्र मैं करता रहा कम्पन।

2.

पलक के कोनों को छूकर
झपकने भर में
तुम्हारी आँखों में रख आया सपना

देखते जिसको काटी है उम्र सारी।

3.
तुम्हारे आने तक
रहेगी धरती
खिलेंगे फूल गाएंगे पक्षी।

बाद उसके न रहेगा होश हमें।

Friday, July 24, 2020

1.
साथ होते, तो होते जुदा,
तुम नहीं, तो तुम-सा हो गए
खड़े रहे यहीं,
रुके तो फिर कहीं नहीं गए।

2.
याद को बांध लिया,
भूल गए खुद को। 

3.
अब नहीं, कहीं अँधेरा
अब नहीं अकेलापन। 

1.
तुम कहती हो,
याद स्पर्श है, प्रियतम की।
तुम कहती हो, तो सच होगा।
2.
तुम्हारे कहने से इश्क़ खिलता है,
महकता है, याद का कोना।
नहीं मिटता लेकिन, तेरा न होना।
3.
तुम्हारे रहने से, रहती है लौ अडिग
बरसते रहते हैं हरसिंगार।
तेरे रहने में, रहता है तेरा छूना।

Sunday, April 21, 2019

तुम हो,
और राजा है।
2
दिखता नहीं मैं,
न तुमको न राजा को।
3
अकालग्रस्त हूँ मैं
न भूलूंगा पर तुम्हे, न बख्सुङ्गा राजा को।
4
प्यार मिले तुमको, आह राजा को।
5
जाता हूँ अब।

Tuesday, April 16, 2019


१.
वापस, लौट आया
कहीं नहीं गया फिर
रह गया जड़
न ली सांस कभी फिर।

लौट आया खुद के पास
लौट आया, तुम्हारे दर से।

२.
दूर हुआ तुमसे,
न जिया न मरा।

३.
तुम दूर हुए नहीं,
मैं पास नहीं आया
उधार ली ज़िन्दगी, वही पहने रहा।

Tuesday, April 9, 2019

उदास रात, बस तुझे याद करता हूँ।

उदास रातों को, गुदगुदाते नहीं ख्वाब
चांदनी झरती नहीं
न खिलता है हरसिंगार।
उदास रात,
बस तुझे याद करता हूँ।
उदास रातों को और उदास कर जाती हो तुम।

Sunday, September 14, 2014

ज़िन्दगी बोर है, तुम्हारे बिना।

१. 

लम्बी बरसात 
बोर होती है, बिना चमक 
ज़िन्दगी बोर है, तुम्हारे बिना। 

२. 

अनवरत बरसात 
भिगो देती है धरती, धरती की हरयाली 
मन और सूख जाता, तुम्हारे बिना। 

३. 

बरसात कभी कभी 
दरकचा देती है, घर की दीवारें 
नींव ढहती मेरी, तुम्हारे बिना। 









Sunday, September 22, 2013

तुम नहीं, कहीं भी मेरे भीतर

१.

तुम नहीं,  कहीं भी मेरे भीतर
रखूं कहाँ,
दिल नहीं, कहीं भी मेरे भीतर।

२.

टीस नहीं, न दर्द कोई अब 
पता है,
ज़िन्दगी आसान बहुत अब। 

३. 

मज़बूत बहुत, बहुत मज़बूत मन 
दरक जाता,
अचानक, कोई अनचिन्हा मन।  


Thursday, August 29, 2013

एक, वायदा है निभा।

१. 

एक तस्वीर बराबर
ज़मीन का टुकड़ा 
औ 
दिल की कोठरी 
इतना ही,
सियासत मेरी।

२. 

तुमसे,
तक़रार तेरी निगाहों में। 
रक्ताभ कोनो को तनिक गाढ़ा, 
मुस्कान कर गहरी
जीती 
तुमने ही हर बाज़ी।

३. 

एक,
वायदा है निभा।
कमज़ोर कर न देना 
खुद मेरा होना,
है,
इसमे बस तेरी बदनामी 
और यही मंज़ूर
नहीं मुझको।

Tuesday, August 20, 2013

इतनी, बार लिखा तुमको।

१. 

इतनी,
बार लिखा तुमको।  
कि,
बस मेरी कविता में 
जिंदा तुम। 

२. 

एक,
अंत की तलाश में हूँ मैं। 
एक अंत,
जो कर दे परिभाषित 
मेरा होना अब तक। 

३. 

तुम,
जिसे चाहिए मेरा एक कोना। 
तुमने, 
ध्यान दिया ही नहीं 
लिखा है, बस अब तक तुमको। 

Sunday, May 5, 2013

इंतज़ार

इंतज़ार 
उस  एक पल का
बंद कर दोगे तुम,
प्यार करना।

मुक्त हो जाओगे 
तुम,
बंद कर दोगे 
नफरत भी।

Sunday, April 21, 2013

एक दिन और

१. 

एक दिन और 
पुनः एक दिन 

ज़िन्दगी खींच रहा।

एक दिन और, 
कोई तोहमत न आए तुझपर।

२. 

तुम्हे शिकायत है,
चाल चलन से मेरे।

मुझे पता है,
तुम्हे मेरी आदत नहीं।

३. 

इंतज़ार है मुझको 
तेरे लिए, या तुझको भी

बंद कर दोगे तुम 
प्यार मुझसे।

मुक्त मुझसे, मिले
तुझे धरती, आकाश तेरा। 



Wednesday, November 28, 2012

कुछ इस तरह

1.

कुछ इस तरह,
बदला हो तेरा,
छोड़ दे तू 
नाराज़ होना।

2.

कुछ इस तरह,
प्यार करे तू,
भूल जाये तू,
जिसे प्यार करे।

3.

कुछ इस तरह,
बंटवारा खुशियाँ का,
चहरे तक  कभी, 
न पहुंचे गम तेरे। 
   

Tuesday, November 20, 2012

मुझे आदत है, तेरे ठोकर की।

1.

समतल ज़मीन पर,
इक टुकड़ा पत्थर।
मुझे आदत है, तेरे ठोकर की।

2.

मिलना, मिलते रहना
मरने में मज़ा आ जाता है।

3.

डर कभी न था,
ज़िन्दगी तुझसे जुदा होने का।
अब प्यार भी नहीं करता, तुमको।





   




Monday, November 5, 2012

तुम हो गए, मुक्त


तुम हो गए,
मुक्त 
भूल कर, मुझको 

बस साथ चलता रहा, 
मैं।

मुआफ़ न किया;
न भुला तुमको।

2.

हर हंसी बाद,
पैठी गहरी उदासी,
मौत आती है, आहिस्ता आहिस्ता 

3.


मुझे  याद नहीं,
मेरी इच्छाएं,
न पहली न आखिरी कोई,
मर गया क्या 
सचमुच मैं।   
 
4.

मेरा अंत, 
बता दो मुझको।

पता चले 
क्या अंत तक सहा तुमने, मुझको।

१. पूछो राम  कब करेगा  यह कुछ काम । २. कर दे सबको  रामम राम  सत्य हो जाए राम का नाम  उसके पहले बोलो इसको  कर दे यह कुछ काम का काम । ३. इतना ...