अनायास मुस्कान
तीव्र प्रेय आकांक्षा
कभी
स्नायु दबाव
आस पास रही हो तुम
बिना कॉमा लिखी गई कविता
पूर्ण विराम पाती तुम पर.
2.
तुम
सर्वनाम हो
विस्थापित करती मेरी संज्ञा को.
3.
मेरी महत्ता
तुम विशेषण.
१. कमाल है कि तुम गंध नहीं पा रहे देख रहा हूं मैं सड़ गया फ्यूचर। २. कमाल है कि मसीहा तुम्हारा अब भी सुन रहा हूं मैं उसकी गालियां भद्दी। ३...
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