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Sunday, September 14, 2014

ज़िन्दगी बोर है, तुम्हारे बिना।

१. 

लम्बी बरसात 
बोर होती है, बिना चमक 
ज़िन्दगी बोर है, तुम्हारे बिना। 

२. 

अनवरत बरसात 
भिगो देती है धरती, धरती की हरयाली 
मन और सूख जाता, तुम्हारे बिना। 

३. 

बरसात कभी कभी 
दरकचा देती है, घर की दीवारें 
नींव ढहती मेरी, तुम्हारे बिना। 









Tuesday, July 5, 2011

मरता सावन

टपकता है
बूँद बूँद 
अनवरत
इस मौसम 
आग

मानसून 
बहा ले जाता है
स्व

धुला इस बारिश 
पुण्य 
तमाम उम्रों का,
तमाम कर्म
अग्निलीक  लील गई

शेषबिंदु है
यह, 
मरता सावन
विलुप्त केंद्र  
क्षय होता, 
मेरा मैं .


१. पूछो राम  कब करेगा  यह कुछ काम । २. कर दे सबको  रामम राम  सत्य हो जाए राम का नाम  उसके पहले बोलो इसको  कर दे यह कुछ काम का काम । ३. इतना ...