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Saturday, January 9, 2021

 1.

क़त्ल किया वक़्त का 

फिर जिया, 

शून्य में .


2.

तुमसे परे, मुझसे परे आदि अंत से परे 

शून्य में, 

जिया फिर .


3.

तुम घटे, हमसे

उपजा शून्य,

शून्य ही नियति अब . 






Sunday, January 3, 2021

१. 

बेमुरौवत निकले ख्वाब 

ख्वाब न आँखों से निकले 

रहे गए ख्वाब आँखों में 

न कोई और ठौर ठिकाना।  

२. 

वही दिन वही रात रहे। 

दिन और रात, समय सिमटा 

साल महीने हफ्ते बेमानी 

वही दिन वही रात रहे 

न बदला कुछ। 

३. 

नहीं पता, 

क्या नया साल का मतलब।  


 

Saturday, January 2, 2021

1.

इंतज़ार लम्बा 

पांच फुट पांच इंच 

हासिल सिफर। 


२. 

संभाल रखा मैं ताउम्र मैंने 

तमाम उम्र दूर रहा 

तुझसे 

खुदसे. 


3.

अंध कुआं जीवन 

दीखता मुझको 

धृतराष्ट्र न होने की कीमत .

Monday, April 22, 2019

१.
बंद आँखों सुना, किया नमस्ते
कहा, भारत माता की जय
पी चाय, मारा सुट्टा और फिक्रमंद हुआ अन्धो को लेकर
खरीद ली छड़ी,
जादुई चश्मा।  देखने लगा हरियाली।
आँखे रखी बंद
उड़ती रेत, पड़ न जाए आँखों में।

२.

अंधा बना रहा मैं
फोड़ता रहा जब वो आँखे
यही चतुराई थी।

३.

चतुर बना रहा मैं,
छलता चला गया वह।

 ४.

जादुई चश्मे से देखता हूँ सपना।

५.

ज़िंदा हूँ अभी। 

Tuesday, April 16, 2019


१.
वापस, लौट आया
कहीं नहीं गया फिर
रह गया जड़
न ली सांस कभी फिर।

लौट आया खुद के पास
लौट आया, तुम्हारे दर से।

२.
दूर हुआ तुमसे,
न जिया न मरा।

३.
तुम दूर हुए नहीं,
मैं पास नहीं आया
उधार ली ज़िन्दगी, वही पहने रहा।

Tuesday, April 9, 2019

गवाही।

१.
चुप्पी !
२.
गवाही।
३.
टूट गया सब
और आवाज़ न हुई
कोई बात नहीं
नई कोई बात नहीं हुई।
तुम चले गए
और रात हुई।

प्रेम का कायर होना.

1.
दुख है, प्रेम।
2.
दुख है, कायरता।
3.
बड़ा दुख है, प्रेम का कायर होना।

Friday, June 5, 2015

पुनः पुनः

१. 
दिन ढला 
पुनः पुनः 
शाम से रात ही, समय का सफर। 

२. 

इंतज़ार 
पुनः इंतज़ार 
तुमसे मिलना ही, एकमेव ख्वाहिश। 

३. 

छपाक छपाक 
उम्मीदों का सफर 
तैरता मैं अंतहीन। 

Saturday, January 17, 2015

तुम्हारी कटान है या हीरे की आरी।

१. 
नशा ही नहीं,
खूबसूरत भी। 
अफीम है तो मज़ेदार।

२. 

इस पार से या उस पार से
परदा हटे तो 
दीदार भी हो। 

३. 

बहुत बारीक़ 
बहुत तेज़ 
तुम्हारी कटान है या हीरे की आरी। 

४. 

पसीना भी अच्छा 
फेरोमोन्स 
और स्वाद रंगीन। 

५. 

नमक इश्क़ का 
बेमुरौवत फीका 
चटक वासना की डली। 

Sunday, January 11, 2015

१. 

सिरों के परे, दिखती दुनिया विशाल,
सिरों  मध्य मैं झूला। 

२. 

अटक गया मध्य कहीं मैं,
ज़िन्दगी है कि डमरू कोई। 

३. 

दोनों छोर खुले  हुए 
कई कई छेदों से बजता मैं। 


Saturday, December 13, 2014

गठरियों पर लदी गठरियाँ,

१.

मांग लूंगा पहली दुआ,
गर मर के खुदा मिला।

२.

इसके पहले कि मर जाए खुदा 
मन्नतें मांग लूँ, उम्र लम्बी हो। 

३. 

गठरियों पर लदी गठरियाँ, नहीं पता 
ढो रहा मैं दुनिया या दुनिया मुझको। 




Wednesday, October 22, 2014

बोझ यादों का भला।

१.

तर्क की गंध ही बारूदी 
हिसाब की लौ मद्धम। 
आग लगा दो हिसाब औ तर्क को। 

२.

नहीं बेहतर कुछ, रात की बारिश से 
अँधेरे में खुशबू और छपाछप। 
हो रात तो, करो बारिश। 

३. 

याद भी जलाती है 
स्वप्न झरते हैं यादों में। 
मन के खालीपन से बोझ यादों का भला। 




Monday, October 13, 2014

मतलब कोई नहीं।

१. 

सफर में  हैं 
मैं भी तुम भी। 
अंत तो है सफर का 
मतलब कोई नहीं। 

२.

अनुराग विराग सब 
तुमसे हैं। 
कुछ नहीं पार 
ज़िन्दगी के इस तरफ या उस तरफ। 

३. 

वार करो या सहो 
युद्ध नियति है। 
हमारा होना ही है 
जंग का होना। 



Sunday, September 28, 2014

बंद कर दो पढ़ना झूठा इतिहास।


मान लो, खुद चुन सको पैदा होने या मरने का समय। 
मान लो और चुनो एक समय खुद की पैदाइश का। 
चाहोगे पैदा होना किसी महान समय 
मसलन अशोक या अकबर के समय ?
मुझे जवाब पता है 
तुम नहीं चाहोगे चुनना मौत कलिंग या चित्तौड़ में। 
बंद कर दो पढ़ना झूठा इतिहास। 
और बंद कर दो वर्तमान को कलंकित करना। 




Wednesday, September 24, 2014

अपराध से काम तो नहीं खुश होना।

१. 

तमाम बातों के बाद भी 
बची रह जाती हैं ज़रूरी बातें। 
मुद्दतों बाद तुम्हारे जाने के,
बची रह जाती है, थोड़ी रात। 

२. 

दुहराना ज़िन्दगी को, नागवार। 
एक ही मंत्र का पुनरुच्चार 
अभिव्यक्ति का दुहराव
प्रेम का पुनः प्रेषण, नागवार। 

३. 

फ़र्क़ है हंसी और ख़ुशी में
हंसती हुई कामकाजी औरतें खुश तो नहीं। 
इस क्रूर समय में 
अपराध से काम तो नहीं खुश होना। 




Saturday, September 20, 2014

मन गिनता है, अघटित भी ज़िन्दगी।

१. 

भ्रम है
रक्त लाल है, गाढ़ा या पतला।
लाल जब आपकी बारी हो 
हालत पतली, तो पीला।
बारी बारी सफ़ेद काला खून, बहुरूपिया। 

२. 

यूँ तो 
वर्षारंभ या अन्य दिन कुछ नहीं, दिन होने के सिवा।  
पर इंतज़ार रहता है 
वर्षांत का। 
इसी इंतज़ार में इज़ाज़त है, वर्ष भर खुद को घसीटने की। 

३. 

बचा नहीं 
बचपन न बचा यौवन। 
देह औ मन का ताप हुआ ठंडा 
फिर भी 
मन गिनता है, अघटित भी ज़िन्दगी। 


Friday, September 19, 2014

जबकि पता है मुझे

१ 

जबकि पता है मुझे 
शब्द से बेहतर, न जगह कोई, आशा हेतु
निज मन पाल रखा हूँ। 
साथ मेरे, बुझती जाती हैं आशाएं। 

२. 

जबकि पता है मुझे 
दिन है उजाला, बिन रोशनी का वक़्त, रात 
उदास मापांक से नापता मैं, वक़्त। 
वक़्त के बस दो चहरे, उदास या गुलज़ार। 

३. 

जबकि पता है मुझे 
शक्ल साम्य होना अचरज नहीं, इन दिनों 
एक ही साँचा गढ़े तमाम लोग। 
मेरे चहरे पर न चढ़ा कोई और चेहरा। 





Wednesday, October 2, 2013

१.

सच सह नही पाता साथ 
एक सच
झूठा कर देता है, बाकि सब। 

२. 

मौत, तेरे आगे सब झूठे। 

३.

नहीं, कई बार कोइ मतलब। 
सच भी बेमतलब, झूठ बेमतलब। 




 


Monday, September 23, 2013

नौकरी के चंद किस्से 2

१.

आवाज़ करे शोर
मद्धम जले लौ 
सांस बंद हो 
कुछ यही है, मांग तेरी। 
अफ़सोस,
फैले हैं, फेफड़े
जल रहा भभक मैं,
चुपचाप।  

२. 

पता है तुम्हे,कमी 
थोड़ी कैद की, लगनी है आज़ादी 
देखा है,
हालत अपने मुल्क की। 
पता है तुम्हे, सही 
रास्ते लग जाऊंगा मैं 
अंदाज़ा नहीं 
तुम हुए बुज़ुर्ग और मैं जवान हूँ। 




Wednesday, September 18, 2013

घात , लगाए बैठे हैं सारे कौवे।


१. 

सड़ांध,
ऐसी समझ न आए 
बगल नाली की, बीट कौवे की या निज अस्मत की। 
समझ न आए, ऐसी 
सड़ांध,
अच्छी है, नाली, कौवे या खुद के लिए। 

२. 

भाई,
मत लौट के आना। 
घात ,
लगाए बैठे हैं सारे कौवे। 

३. 

दूब की इक डंठल
इतनी ही हरियाली।
ज़मीन से चिपक 
बच जा 
कौवों से। 




१. पूछो राम  कब करेगा  यह कुछ काम । २. कर दे सबको  रामम राम  सत्य हो जाए राम का नाम  उसके पहले बोलो इसको  कर दे यह कुछ काम का काम । ३. इतना ...