1.
क़त्ल किया वक़्त का
फिर जिया,
शून्य में .
2.
तुमसे परे, मुझसे परे आदि अंत से परे
शून्य में,
जिया फिर .
3.
तुम घटे, हमसे
उपजा शून्य,
शून्य ही नियति अब .
१. कमाल है कि तुम गंध नहीं पा रहे देख रहा हूं मैं सड़ गया फ्यूचर। २. कमाल है कि मसीहा तुम्हारा अब भी सुन रहा हूं मैं उसकी गालियां भद्दी। ३...