१.
बेमुरौवत निकले ख्वाब
ख्वाब न आँखों से निकले
रहे गए ख्वाब आँखों में
न कोई और ठौर ठिकाना।
२.
वही दिन वही रात रहे।
दिन और रात, समय सिमटा
साल महीने हफ्ते बेमानी
वही दिन वही रात रहे
न बदला कुछ।
३.
नहीं पता,
क्या नया साल का मतलब।
१. कमाल है कि तुम गंध नहीं पा रहे देख रहा हूं मैं सड़ गया फ्यूचर। २. कमाल है कि मसीहा तुम्हारा अब भी सुन रहा हूं मैं उसकी गालियां भद्दी। ३...
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