Thursday, June 10, 2021

सर पर ताज हो

सर पर ताज हो 

मन भर आनाज हो 

काम नहीं काज हो 

साहेब सा  राज हो। 


चार चापलूस हों 

हज़ार जासूस हों 

कोटि कोटि भक्त हों 

बोटी हो रक्त हो 

कभी नहीं हार हो 

जय हो जयकार हो।  


नंगा हो भूका  हो  

मोटा हो सूखा हो 

शुन्य प्रतिकार हो 

अपनी सरकार हो।  






मसीहा

१. कमाल है कि  तुम गंध नहीं पा रहे देख रहा हूं मैं  सड़ गया फ्यूचर। २. कमाल है कि  मसीहा तुम्हारा अब भी सुन रहा हूं मैं उसकी गालियां भद्दी। ३...