सर पर ताज हो
मन भर आनाज हो
काम नहीं काज हो
साहेब सा राज हो।
चार चापलूस हों
हज़ार जासूस हों
कोटि कोटि भक्त हों
बोटी हो रक्त हो
कभी नहीं हार हो
जय हो जयकार हो।
नंगा हो भूका हो
मोटा हो सूखा हो
शुन्य प्रतिकार हो
अपनी सरकार हो।
सर पर ताज हो
मन भर आनाज हो
काम नहीं काज हो
साहेब सा राज हो।
चार चापलूस हों
हज़ार जासूस हों
कोटि कोटि भक्त हों
बोटी हो रक्त हो
कभी नहीं हार हो
जय हो जयकार हो।
नंगा हो भूका हो
मोटा हो सूखा हो
शुन्य प्रतिकार हो
अपनी सरकार हो।
१. कमाल है कि तुम गंध नहीं पा रहे देख रहा हूं मैं सड़ गया फ्यूचर। २. कमाल है कि मसीहा तुम्हारा अब भी सुन रहा हूं मैं उसकी गालियां भद्दी। ३...