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Saturday, January 17, 2015

तुम्हारी कटान है या हीरे की आरी।

१. 
नशा ही नहीं,
खूबसूरत भी। 
अफीम है तो मज़ेदार।

२. 

इस पार से या उस पार से
परदा हटे तो 
दीदार भी हो। 

३. 

बहुत बारीक़ 
बहुत तेज़ 
तुम्हारी कटान है या हीरे की आरी। 

४. 

पसीना भी अच्छा 
फेरोमोन्स 
और स्वाद रंगीन। 

५. 

नमक इश्क़ का 
बेमुरौवत फीका 
चटक वासना की डली। 

Thursday, December 22, 2011

मैं........

१.
तमाम बातों का,
एकाध सिरा

कभी कभी पकड़ आता..........

समझ आता
अजनबी मैं  कितना /
रहने और जीने के तमाम नुस्खे.......
सुनता, जब जब
उदासी पैठती, रह रह
होता जाता हूँ कुछ और अकेला......

२.

कोना,
सावंली छाया का,
छू गयी मुझको.

दाग मैं लिए फिरता .

अँधेरी रात
अँधेरा काला
ये दुनिया रहती जिसमे
सह नहीं पाती मुझको.

नहीं चाहिए रौशनी इसको,
मुझे बर्दास्त नहीं, दाग मेरा.....

३.

किसी के रूकने तक,
मेरे लिए:
मैं नज़र आता नहीं,

मैं नज़र नहीं आता
रुकता नहीं, कोई,
मेरे लिए !!!!!! 




विदा हैदराबाद..............

१.
सुना तुमने,
मुझे हंसते,
मुस्कान आदत केवल.

हर एक बात
बिपरीत जाती हो,
मेरा बचाव हँसी..

२.

हैदराबाद,
लौटा दिया/ हाथ खाली

कुछेक दोस्त दिए,
 दिल को जोड़े.....

३.

चीरता सन्नाटा
अपनी साँसों में घुटा अटका
ज़िन्दगी रोके थी अब तक.

हैदराबाद, 
भरी तुमने फेफड़ों में गर्मी,
मिली वापस 
हंसी मुझको

शुक्रिया तेरा  !!!!!!!

Monday, October 24, 2011

गाँव.................... village visit..86th F.C.


झांक, 
ट्रेन की खिड़की,
खेत समतल
हरियाली कहीं बिखरी,
नंग धडंग बच्चे,
धुल से बीन कंकर
फेंकते,
हँसते, मुस्काते, टाटा बाय बाय  करते,
.........................................................
........................................................
    गाँव रोमांटिक है,
    ट्रेन की खिड़की से.

२.

आओ,
पधारो !

माई बाप आप हो,

पढ़ी होंगी, 
किताबें हज़ार, हमारे बारे में.
लिख दोगे 
किताबें हज़ार, हमारे बारे में.

महाराज हैं
आप सभी लोग
आओ 
पधारो!

खँडहर हम,
बिखेर जाओ थोड़ी जूठन,
आखिरी बार आना है 
माई बाप, किसी गाँव आपका.

Thursday, October 13, 2011

मटमैले पहाड़ पर हरियाली ...

१.

घूमती धरती 
छलांग लगा जाता हूँ,

तेरी कक्षा से परे 
गिर जाता हूँ ,
शून्य में कहीं !

२.
 धुंए में बादल
बनाते थे,
वह बचपन था .

बादल को धुंआ धुआं 
देखा आज.


३.
 मटमैले पहाड़ पर हरियाली 
बेतरह तेरी याद आती है .

४.

कैनवास ,
धरती क्षितिज औ आकाश 
भागते चित्र 
सजोयें लम्हों तक 

ज़िन्दगी सिमटते जाना.

५.

उदास मुस्कान फूलों की,

मेरे भीतर 
ततैया मर जाता है .

१. पूछो राम  कब करेगा  यह कुछ काम । २. कर दे सबको  रामम राम  सत्य हो जाए राम का नाम  उसके पहले बोलो इसको  कर दे यह कुछ काम का काम । ३. इतना ...