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Sunday, August 10, 2014

न कह सका अपनी, न सुना तेरी

न कह सका अपनी, न सुना तेरी
ज़िन्दगी, हम रह गये अपरिचित ही।

साथ होने से ही, हैं हम दोनों
अजीब है नहीं, हमारा होना ही।

चन्द सांसें दी हैं तुमने मुझको
एक तुमको मिला मुझसे, मायना ही।

नहीं साम्य कहीं, मध्य हम दोनों
तुम घटते गए, मैं बढ़ा ही। 












Monday, June 20, 2011

गज़लें-2

कोई नहीं शिकायत, कोई नहीं गिला
मुझको मिला वही, जो दुनिया का सिलसिला .

मेरी चिता से रौशन, जगमग जो तेरे ख्वाब
तेरी कलम को दूँ मैं, मेरे सारे किताब .

महफ़िल  में मेरी अपनी, बदनाम हो गया हूँ
कहने लगे हैं लोग, नीलाम हो गया हूँ .

बादल पे पैर रख, थी जिंदगी परवाज़
कुमकुम भरा था कल, रीता हुआ है आज .

मुझपे थी भारी , मेरी उम्मीद की उठान  
गिरता गया हूँ हरदिन, मेरी जिंदगी ढलान .

तुमसे नहीं शिकायत, तुमसे नहीं गिला
तुमने किया वही जो दुनिया का सिलसिला .


Friday, June 10, 2011

गज़लें ...1.

रात गत होते, बारहा याद आए तुम
 पहले पहल आज ही, भूला तुमको .

मेरे अफ़साने पे, नहीं मुझको ही यकीं 
जला जो दिल , धुआं लगा तुमको .

तुम्हारे रंग कई थे,हैं, औ रहेंगे हरदम 
उदास आँख मेरी, देगी न जला तुमको .

मन था पत्थर  , अब तरल पिघला 
खुद में कैद, बौना सा दिखा  तुमको .

मलाल चाँद करेगा, रात कर रौशन
तोड़ते ख्वाब सब, ख्याल न आया तुमको .











१. पूछो राम  कब करेगा  यह कुछ काम । २. कर दे सबको  रामम राम  सत्य हो जाए राम का नाम  उसके पहले बोलो इसको  कर दे यह कुछ काम का काम । ३. इतना ...