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Monday, September 23, 2013

नौकरी के चंद किस्से 2

१.

आवाज़ करे शोर
मद्धम जले लौ 
सांस बंद हो 
कुछ यही है, मांग तेरी। 
अफ़सोस,
फैले हैं, फेफड़े
जल रहा भभक मैं,
चुपचाप।  

२. 

पता है तुम्हे,कमी 
थोड़ी कैद की, लगनी है आज़ादी 
देखा है,
हालत अपने मुल्क की। 
पता है तुम्हे, सही 
रास्ते लग जाऊंगा मैं 
अंदाज़ा नहीं 
तुम हुए बुज़ुर्ग और मैं जवान हूँ। 




Thursday, September 12, 2013

चंद बातें नौकरी से.…

चंद बातें नौकरी से.… 

१. 

आज कल मेरा भी दिन है,
हर किसी का मुक़र्रर है, इक दिन। 

२. 

कुंकुआना औ भौंकना,
इतनी ही, भाषा मेरी। 

३. 

सफ़ेद मख्खन, काला स्वाद,
ज़िन्दगी, दुहरा मसाला।

४. 

बखूबी याद है, मुझे अपनी चीर फाड़,
नहीं दूजा अब, मुझसे बेहतर सर्जन।

५.

नहीं रही किसी को, मूछें
सवाल किसकी कितनी बड़ी पूँछ।  



१. पूछो राम  कब करेगा  यह कुछ काम । २. कर दे सबको  रामम राम  सत्य हो जाए राम का नाम  उसके पहले बोलो इसको  कर दे यह कुछ काम का काम । ३. इतना ...