Tuesday, February 26, 2013


 १. 

धरती है आग गोला,
हरियाली में छिपती।
मैं नहीं धरती जैसा . 

२. 

संगीत तुमको,
छेद छेद हुआ मैं।
बांसुरी बन . 

३. 

चुप हूँ,
सुन रहा।
जो नहीं भी मेरा .

४. 

उसने  सही अपनी,
तुमने सही अपनी।
सह रहा मैं किसकी .


फिर क्यूँ मैं हूँ.....

कितना जानें  कितना मानें  ख़ुद को कितना पहचानें । कहाँ रेफ है  सेफ़ कहाँ है  बीता कितना  बचा कहाँ है  कितना कच्चा-सड़ा हुआ है  मौत मौत है  ज...