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Sunday, December 21, 2014

नींद नहीं आती ख्वाब आते रहे दिन औ रात।

१. 
कब्रगाहों में दफ्न 
आशाओं के तेवर,
कुंडली मार छिप गयीं 
योजनाएं ख़ुशी की,
और काई पर फिसल गई 
तेरी हँसी 
बेतरतीब बिला वज़ह ख्वाब दर ख्वाब आती रहती है। 
परत दर परत जमते जाते हैं मुझ पर ख्वाब मेरे। 

२. 

नींद नहीं आती 
ख्वाब आते रहे दिन औ रात। 

३. 

देखी बचपन में भूली भूली भुतहा फिल्मो सी 
पता नहीं ख्वाब है या खुद मैं। 

Thursday, June 16, 2011

नई भाषा 
जिसे समझते हम केवल
नए गीत 
जिसे गाते हम केवल

हम देखते चार आँखों से
दो आँखों में तैरता 
मेरा बचपन 
दो आँखों में
रंगोली तेरी

नई गिनती 
जो नापती देह तेरी
नए चिह्न 
पहुँचाने को मेरे ख्वाबों तक

मैं जानता था 
मर जाओगी तुम इक दिन 
कुछ भी नया नहीं हुआ
तुम नहीं बची जिन्दा 

टूटे ख्वाब पर 
नहीं आया रोना मुझको.



Wednesday, June 15, 2011

जब  कभी
बच के निकलती 
तुम
छतरी ताने 
बचते हुए बर्फ वा बारिश से

तुम पर उड़ेल देता 
कर बादल उल्टा,
बंद मट्ठी में लाता
चुटकी बर्फ तुम्हे चखने को 
तुम नाराज़ होती 

मै जानता 
दिखावा है नाराज़ होना..

तप्त मन को पड़े फफोले 
हुई बारिश जब जम कर
मन और तपा
मैं और जला 
टूटे ख्वाब पर नहीं आया रोना मुझको..



Saturday, June 4, 2011

अधूरे स्वप्न.....1.

तुम नाराज़ हो, उठने लगती,
समेट तुम्हे बाहों के घेरे 
सुनाता 
कई बार कहानी वही 
नायिका जिसकी, तेरी परछाई .

बंद मुट्ठी  में लाता,
थोड़े बादल..थोड़ी बारिश..
मलता होंठो पे तुम्हारे  थोड़ी बर्फ  
बाल कर गीले, छू लेता  
खा लेता थोड़ी डांट तेरी .

सारी रात 
साथ बुनते गीत
सारे दिन तुम अलसाती .  

पढ़ते हम  
कम किताबें-
बांया मैं, दांया पन्ना तुम .  
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आज
जब किताबों की
की चिंदी,
अधूरे ख्वाबो पे नहीं आया रोना...

१. पूछो राम  कब करेगा  यह कुछ काम । २. कर दे सबको  रामम राम  सत्य हो जाए राम का नाम  उसके पहले बोलो इसको  कर दे यह कुछ काम का काम । ३. इतना ...