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Friday, July 24, 2020

1.
साथ होते, तो होते जुदा,
तुम नहीं, तो तुम-सा हो गए
खड़े रहे यहीं,
रुके तो फिर कहीं नहीं गए।

2.
याद को बांध लिया,
भूल गए खुद को। 

3.
अब नहीं, कहीं अँधेरा
अब नहीं अकेलापन। 

Wednesday, July 17, 2013

गैरहाजिरी, रही उपस्थित हरदम

१. 

सुबह,
निराश हो गयी।
मैं निकला, कह 
लौट 
आऊँगा शाम ढले।
शाम,
रोज़ सहती मुझको।

२. 

तुम,
रूक नहीं पाए।
गिनती कर बंद,
वक़्त 
पसरा है लथपथ।
गैरहाजिरी,
रही उपस्थित हरदम।

३. 

सन्नाटा,
गहरी आवाज़ करता।
विरल खड्ड में,
आत्मा 
बिखरी, सिकुड़ी है।
उठान,
खोता अतित्व अपना।

Saturday, March 2, 2013

अंधकार

१.

रात कई गुज़री,
लगता है आज फिर,
नहीं सुबह कोई।
मेरा कोई अंत नहीं।

२.

अंधकार,
डराता है पहले।
डर लगता है,
उजाले से फ़िर।





Sunday, December 4, 2011

जानना चाहता नहीं............

जानना चाहता नहीं,

कई सवाल
उठते, गिरते
गिराते उठाते मुझको.

जानना चाहता नहीं,
मेरे शब्द, आवाज़; मेरे लिए या खिलाफ मेरे

यादें,
वजूद पर भारी; प्रत्याशा में गढ़ी यादें

जानना चाहता नहीं,
वजूद या गढ़ी यादों में ज़रूरी क्या है....  

Wednesday, October 21, 2009

अकेलापन

        १.
      
बंद दराज़ से निकल
छा जाता है ,                                           
धुंधले अंधियारे सा
घेर लेता है 
अकेलापन.

२.

 स्याह 
मन का फैलाता हुआ 
चुप चाप पैठ जाता  है 
मन पर छाया
अकेलापन.
                  
३.
                             
साथ तुमको लिए चलता है 
अकेले नहीं आता
अकेलापन.

१. पूछो राम  कब करेगा  यह कुछ काम । २. कर दे सबको  रामम राम  सत्य हो जाए राम का नाम  उसके पहले बोलो इसको  कर दे यह कुछ काम का काम । ३. इतना ...