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Sunday, January 11, 2015

१. 

सिरों के परे, दिखती दुनिया विशाल,
सिरों  मध्य मैं झूला। 

२. 

अटक गया मध्य कहीं मैं,
ज़िन्दगी है कि डमरू कोई। 

३. 

दोनों छोर खुले  हुए 
कई कई छेदों से बजता मैं। 


Wednesday, September 17, 2014

मुझे पता होता है


१.

अंदाज़े से परे
मेरा ही मन लगा रहा होता है, एक और अंदाज़ा। 
मुझे पता होता है
जब गलत होते हैं, सभी दांव मेरे। 

२. 

पता चले तुम्हे 
पूर्व इसके, बदल लेता हूँ मैं अपना चोला। 
पढ़ते रहते तुम चेहरा 
जब तुम्हारे अंतरतम, पलते हैं सपने मेरे। 

३.

क्या खूब आसान 
मेरी चाहत की बस्ती, बिना मोड़, विराम बिना।
योजनाओं की जद में  
खुद केंद्रित, सायास घाव करते, घात मेरे। 





Saturday, August 2, 2014

बीत रहा मै...

 १. 

व्यर्थ,
या अन्यथा
बीत रहा मै। 

२. 

भरा पूरा,
ठसक ठसक 
रीत रहा मैं। 

३.

चलती नहीं,
ख़त्म होती ज़िन्दगी
टीस रहा मैं।  








Friday, October 18, 2013

तमाम रंग हैं उजले।

१. 

ज़रूरी नहीं,
मुझसे जुड़ना। 
मेरी सार्थकता, जीने की हिम्मत बची रहे तुझमे। 

२. 

तमाम रंग हैं उजले। 
अंधेरे की, हिस्सेदारी रहने दो मेरी।  

३. 

मुद्दतों बाद मिलेंगे, पहचान लेना 
सूरत मेरी,
बदलती रहती। रहता मैं वहीँ स्थिर। 

Wednesday, August 7, 2013

फिर से हाज़िर हूँ हुज़ूर

ख़त्म हुआ
भ्रम,
मिट गई 
आशा,
अभिशप्त हैं पुनः जी उठने को। 

बहाने मिल ही 
जाते हैं 
ठहाकों को मेरे।

२. 

फिर से 
हाज़िर हूँ हुज़ूर 
आपके
दरवाज़े, खरीद लो 
कुछ 
मुस्कान।

Tuesday, July 16, 2013

१. 

जाने पहचाने छंद,
गीत  
बन जाते शोकगीत।
उदास तमाम पद 
लेते, 
ओढ़ मुझे।

२. 

हर नया रास्ता,
तुझ 
तक पहुच जाता।
उलझ गए हैं,
नक्शे 
ज़िन्दगी के।

३. 

बिखरी, बिसरी खुशियाँ,
पकड़ 
अब नहीं आती।
खाली हो गयी 
रेत 
भरी मुठ्ठी।








Sunday, May 5, 2013

इंतज़ार

इंतज़ार 
उस  एक पल का
बंद कर दोगे तुम,
प्यार करना।

मुक्त हो जाओगे 
तुम,
बंद कर दोगे 
नफरत भी।

Thursday, March 14, 2013

ख़ुदा, बिलकुल तेरे जैसा..


१. 

ऊँचा और ऊँचा 
खुद के रहने की जगह ,
ख़ुदा,  बिलकुल तेरे जैसा। 
मैनें भी चुनी है जगह 
क़त्ल हुआ था जहां। 

२ .

समतल ही फैला
नहीं सहारा कोई चढ़ने को,
कुचला गया कदमों तले 
घास,
तुझ जैसा नरम चारा मैं।

३. 

परछाईं मेरी,
तुझ जैसा ही मैं।
महसूस नहीं ,मैं 
किसी छुअन को भी।
अपनी परछाईं भर, मैं।

Tuesday, February 26, 2013


 १. 

धरती है आग गोला,
हरियाली में छिपती।
मैं नहीं धरती जैसा . 

२. 

संगीत तुमको,
छेद छेद हुआ मैं।
बांसुरी बन . 

३. 

चुप हूँ,
सुन रहा।
जो नहीं भी मेरा .

४. 

उसने  सही अपनी,
तुमने सही अपनी।
सह रहा मैं किसकी .


Monday, November 5, 2012

तुम हो गए, मुक्त


तुम हो गए,
मुक्त 
भूल कर, मुझको 

बस साथ चलता रहा, 
मैं।

मुआफ़ न किया;
न भुला तुमको।

2.

हर हंसी बाद,
पैठी गहरी उदासी,
मौत आती है, आहिस्ता आहिस्ता 

3.


मुझे  याद नहीं,
मेरी इच्छाएं,
न पहली न आखिरी कोई,
मर गया क्या 
सचमुच मैं।   
 
4.

मेरा अंत, 
बता दो मुझको।

पता चले 
क्या अंत तक सहा तुमने, मुझको।

Saturday, December 31, 2011

क्रोध आता है...

1.

क्षोभ होता है...

धकेल देता जब 
इन ढूहों से,कोई

गिराते, नहीं शिकवा !
  
ज़रा  उठान तक जाने देते,
गिरता भी, आसमान दिखता तो भला.

लौटता, उड़ते उड़ते...     

2.


क्रोध की परिणति है, रूदन.
बेबसी औ' क्रोध
करूं क्या इनका..


३.


ज़िन्दगी चलती है
आक्सीजन है हंसी.. 

   

Thursday, December 22, 2011

मैं........

१.
तमाम बातों का,
एकाध सिरा

कभी कभी पकड़ आता..........

समझ आता
अजनबी मैं  कितना /
रहने और जीने के तमाम नुस्खे.......
सुनता, जब जब
उदासी पैठती, रह रह
होता जाता हूँ कुछ और अकेला......

२.

कोना,
सावंली छाया का,
छू गयी मुझको.

दाग मैं लिए फिरता .

अँधेरी रात
अँधेरा काला
ये दुनिया रहती जिसमे
सह नहीं पाती मुझको.

नहीं चाहिए रौशनी इसको,
मुझे बर्दास्त नहीं, दाग मेरा.....

३.

किसी के रूकने तक,
मेरे लिए:
मैं नज़र आता नहीं,

मैं नज़र नहीं आता
रुकता नहीं, कोई,
मेरे लिए !!!!!! 




Tuesday, July 19, 2011

स्वप्न औ आग

पांच नहीं,
मेरे अवयव 
केवल  दो,

स्वप्न औ आग  
मेरी संरचना.

Thursday, July 14, 2011

अधुरा किया खुद को .

रेशा रेशा 

रंग
उघाड़ता रहा,

बेरंग कर 
कहानी में, फिट करना चाहा,

कुछ दिन लिखी 
कहानी, मैंने
अधुरा किया खुद को .

कहानी, अधूरी  
रेशा रेशा  
उघाडती
अब, मुझको 

Tuesday, June 21, 2011

अब भी मैं

मैं अब भी हूँ
बड़ा विशेषज्ञ,
मनोभावों  का,
दुःख का ,
कष्ट का ,
पीड़ा का.

अब भी मैं 
देख लेता हूँ 
मृत्यु छाया, 
निराशा के गर्त में पड़े हुओं की दशा , 
एक प्रेम से विचलित की दूसरी दौड़,
एक साथ कई को बाँध रखने की ललक .

अब भी मेरे पास इलाज है 
इन सबका
जिन्हें अपना नहीं पाता
मैं खुद के लिए.. 

Wednesday, June 8, 2011

जलना आत्मा का.........

रक्त जल, 
बने कालिख
तब 
बंद हो शायद 
सुलग जलना आत्मा का ?

भष्म 
सब स्वप्न कर 
आहुति दी 
संकल्पों की ;
फिर भी 
धुआं धुआं
सा जलता क्यों है .

क्या 
सचमुच  है 
कोई इश्वर,
लेता हुआ बदला .

धुआं धुआं 
बन 
छोड़ रही है,
आत्मा 
मेरा संग 

एक दिन आएगा
धुआं 
 ख़त्म हो जायेगा धुंए की तरह  
साथ में मेरा मैं. 




Tuesday, May 31, 2011

मैं

१.

बच्चे की
हंसी सा,

गुलज़ार
सुगंध सा

काफूर हो भी,
बना रहता हूँ मैं .

२.

लब पर लिपटा 
अहसास ,

सिरहन
ख़म खयाली का

कभी अचानक ही
उमड़ पड़ता हूँ मैं .

Sunday, May 29, 2011

मैं भूत

"छठी कक्षा थी

शायद

अनुवाद से पहले

पाठ था

काल का .




कल प्यार था

आज प्यार है

प्यार रहेगा हरदम.




वाक्य नहीं बना पाता था

मेरा

भूत औ भविष्य.




वर्तमान, ही

की

संरचना




कुत्ता मरता है

मै रोता हूँ

तुम निष्ठुर हो .




इतने साल बीते

भविष्य नहीं बनता

प्यार रहेगा हरदम ???





वर्तमान हुआ भूत

भूत मुझमें अटका




मैं मरता हूँ

कुत्ता रोता है

तुम निष्ठुर हो .




मैं भूत

नहीं, वर्तमान

नहीं, भविष्य ."

Wednesday, May 25, 2011

सच कहते हो

कहते हो
              मैं कल बीता
भग्न ह्रदय
             मन का रीता
सच कहते हो

सच कहते हो

जीवन जूआ
                   हरदम हारा
छन छन आई
                   धुप ख़ुशी की
श्याम अँधेरा
                  जीवन कारा

जीवन जुआ हरदम हारा

सच कहते हो

कहते हो
              मैं  टूटा तारा
बुझती आँखे
             मंद सितारा

सच कहते हो..







Monday, May 23, 2011

हँसता हूँ..

जब जब जलता हूँ
हँसता हूँ..

हँसता हूँ 
निज जल जाने पर
हँसता हूँ 
खुद मर जाने पर

जब जब मरता हूँ
हँसता हूँ..


हँसता हूँ
जब ख्वाब मिटे
हँसता हूँ
जब राह छिने

जब जब खोता हूँ
हँसता हूँ.. 

१. पूछो राम  कब करेगा  यह कुछ काम । २. कर दे सबको  रामम राम  सत्य हो जाए राम का नाम  उसके पहले बोलो इसको  कर दे यह कुछ काम का काम । ३. इतना ...