१.
बच्चे की
हंसी सा,
गुलज़ार
सुगंध सा
काफूर हो भी,
बना रहता हूँ मैं .
२.
लब पर लिपटा
अहसास ,
सिरहन
ख़म खयाली का
कभी अचानक ही
उमड़ पड़ता हूँ मैं .
१. कमाल है कि तुम गंध नहीं पा रहे देख रहा हूं मैं सड़ गया फ्यूचर। २. कमाल है कि मसीहा तुम्हारा अब भी सुन रहा हूं मैं उसकी गालियां भद्दी। ३...
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