Sunday, May 15, 2011

समय पर तीन कवितायेँ और.....

२-
सभी संभव, असंभव 
जोड़ता हूँ
समय से!

होनी के तमाम कोने
होने का नाभिक
नहीं  का भार
वजूद का हल्कापन
जोड़ता हूँ समय से!

मैं अघटित /
घटता है समय

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