Tuesday, May 17, 2011

समय

१-

ढल गया
ओस कतरन-सा 
समय 
हो संघनित
हो गया है ख़त्म
बिना छाप छोड़े अपनी

२-
समय  का एकायाम
इंतेज़ार
समय से परे 
मिलाप !

३-
रेल मुसाफिर सा
स्थिर, फिर भी विस्थापित
अक्सर आउटर पर खड़ा 
इंतज़ार बारी का
भागते पेड़ 
खिड़की से परे
वस्तुतः खड़े है वही
जैसे 
समय / गतिहीन सदा  


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मसीहा

१. कमाल है कि  तुम गंध नहीं पा रहे देख रहा हूं मैं  सड़ गया फ्यूचर। २. कमाल है कि  मसीहा तुम्हारा अब भी सुन रहा हूं मैं उसकी गालियां भद्दी। ३...