१.
नहीं पता है
नाराज़ किससे हूँ
खुद से ; खुदा से; या तुमसे
नहीं पता है
खतावार कौन
२.
तुम नहीं !
मै नहीं !
दोनों ही
गल्त नहीं
अलग अलग
हमारी सुब्ह
होती क्यूँ है
१. कमाल है कि तुम गंध नहीं पा रहे देख रहा हूं मैं सड़ गया फ्यूचर। २. कमाल है कि मसीहा तुम्हारा अब भी सुन रहा हूं मैं उसकी गालियां भद्दी। ३...
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