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Saturday, January 1, 2022

तंत्र से जन घोंट कर बना वह ईसा है

बहुत लम्बे कान हैं, 

सुनते नहीं कुछ साजिश सिवा  

नुकीली लम्बी नाक है, 

सूंघते हैं साजिश 

आंखों से अँधा है  

अंधा तो अंधा है।  

नेता है गंदा है। 

चाक मध्य पीसा है 

जनता का कीसा है।  

पर 

पूज्य है, पूजनीय है 

महा है, महनीय है 

तंत्र से जन घोंट कर 

बना वह ईसा है 

अपना 

मसीहा है। 



Saturday, September 25, 2021

 ठहरी बात रही 

मेरी तेरी, पूर्ण है वचन उसका 

कहा अनकहा 

मसीहा स्वर है, शब्द है, भाव है 

हम ठहरे हैं, ठहरी बात पर.


2.

हमारा काम,

काम आ जाना 

मसीहा, वही काम है.


3.

राग लय विन्यास भिन्न नहीं 

मेरे तेरे 

हमारा अनुनाद, मसीहा संग. 


Sunday, September 19, 2021

भाषा

एक भाषा

क्या होगा उसका जो ढोती है केवल झूठ.

याद रखी जायेगी, एक विलुप्त झूठी नदी की तरह 

या 

बहती रहेगी, ढोती हुई लोकतंत्र का सच 

मसीहा की जयकार 

संस्थाओं की लाश।  

बहती रहेगी क्या तब भी जब आडम्बर नहीं होंगे 

नहीं होंगे पंचसाला चुनाव। 

जब झूठ नहीं होगा फ़र्क़ सच से,

क्या ज़रुरत होगी भाषा की।   

Thursday, June 10, 2021

सर पर ताज हो

सर पर ताज हो 

मन भर आनाज हो 

काम नहीं काज हो 

साहेब सा  राज हो। 


चार चापलूस हों 

हज़ार जासूस हों 

कोटि कोटि भक्त हों 

बोटी हो रक्त हो 

कभी नहीं हार हो 

जय हो जयकार हो।  


नंगा हो भूका  हो  

मोटा हो सूखा हो 

शुन्य प्रतिकार हो 

अपनी सरकार हो।  






Saturday, February 13, 2021

तमाशा 

गुजर रहे वक़्त का नाम है, तमाशा।

गटर 

सार्वजनिक जीवन है, गटर। 

खेल 

तमाम रियाया संग हो रहा है, खेल। 

जेल 

बिना चहारदीवारी बिन दरवाज़ा जहालत की खुली जेल। 

नेता 

कौन ?

देश 

बेहतर है मौन। 



Tuesday, February 9, 2021

सांझ ढल जाना 
चलते चलते हो जाना रात,
यूं तो कोई कारण नहीं चिंता का 
गर रात ले आए विश्राम 
सूर्यास्त में खो गई रोशनी को स्वप्न में खोजने का हो उपक्रम.

सुबह की खातिर 
रात कट जाती है 
कई रात कट जाती है .

भय का कारण है अँधेरा 
जो दैव थोप देते हैं 
रात जो आसुरी माया हो 
रात जिसमे जिन्न ठग लेते हों ख्वाबों को चाहतों को 
रात. जिसकी चाहत हो रात के अनंत की. 

रात जिसे राजा ने कह रखा दिन है 
अँधेरा जिसे प्रकाश नाम दिया है 
ऐसे अँधेरे से डरता हूँ मैं 
इस रात से खूब डरता हूँ मैं .


एक विशाल नदी 
पश्चिम से पूरब 
पूरा उत्तर, अंश दक्षिण 
बहती है,
मेरे वक्तृव्य की 
मेरे ऐश्वर्य की। 

मेरे भाव भरे 
छत्तीस गुणों से सने 
भक्ति की चरम सुख 
सहज उपलब्ध हैं 
नदी के जल में। 

आकंठ डूब कर 
भक्ति का पान है 
मेरा गौरव है 
मेरा ज्ञान है। 

पश्चिम से पूरब तक उत्तर से मध्य क्षेत्र 
मेरा प्रसाद है बट रहा जो गलियों में तालों में खेतों में 
मेरी भक्ति की फसल देश भर लहलहाए
लौट कर तुम भी तो शरण मेरी आए। 

बजे मेरा डंका 
साकेत या लंका 
मसीहा हूँ मैं 
देश और कुछ नहीं मेरा विस्तार है। 




Friday, February 5, 2021

भय की चौखटे हैं
उस पार है निर्जन। 

मेरी सत्त्ता से परे  
तुम अकेले
तुम निर्बल
डांक नहीं सकते तुम मेरी सत्ता के द्वार 
दिन भर तुम जयकार 
रात करूँ मैं शिकार तुम्हारे विचलन का 
स्वस्थ चिंतन का 
स्वाधीन मनन का। 

तुम्हारी परिधि हूँ मैं 
तुम मेरी छाया हो 
हम साथ द्वन्द हैं 
तुम मेरी माया हो। 

तुम्हारे हीन का, भय का, गर्व का मैं उत्पाद हूँ 
तुम मेरे भक्त जन 
मैं तेरा भगवान् हूँ। 
 


Thursday, February 4, 2021

एक वह ज़िंदा है

समय नहीं समतल
इन दिनों रोज़ ही,
भहरा के गिर जाती है कोई प्रतिमा 
पूज्य कोई च्युत हो जाता है। 

जीवन और कुछ ठहर जाता है।

2.
इन दिनों रोज़ ही 
मर जाता है कोई चूहा 
कुछ और तेज़ रोती है बिल्ली 
भूके पेट सोते हैं बच्चे 
बाप कर बैठा है अनसन .

तमाम कस्बे की आखिरी ज़िद है 
बच्चों की भूख . 

3.
एक की शान 
उसके, बान की खातिर 
नदियों में जहर भर, बादल को कैद कर 
खेतों को कर लज्जित 
चर रहे हम फसल साथ की, सामर्थ्य की, करुणा की, प्रेम की 
प्रेम पर विश्वास की .

एक वह ज़िंदा है 
हम सब विजूका है.









Wednesday, January 27, 2021

1. 

कुछ भी नहीं था .

इक शिकायत रही, कभी कुछ न रहने की.

कुछ नहीं था, फिर 

 वह लगा छीनने,सब, 

जो घुल मिल गए थे हममें

एक एक करके,

ख्वाब, आज़ादी, हक़ और बराबरी .  


2. 

आश्चर्य के, फिर दैन्य के, गीत लिखे हमने 

भरी फिर, विरोध की हुंकार। 

अब बारी थी आवाज़ की, 

आवाज़ छीने जाने की 

हमारे शब्दों पर हमारे दृश्यों पर, हमारे चित्रों पर

कर गूंगा हमें,

उसके गीत गाये जाने की .


3. 

यह दिन थे जब हम मौन हुए 

और साफ़, बिलकुल साफ़ गूंजने लगा उसका अट्ठास. 

Tuesday, January 5, 2021

 हांकता है मसीहा 

भेड़िये भी 

भेड़ भी 

एक सीध में, झुके सर चलते जाते हैं 

भेड़ भी, भेड़िये भी .


प्रजातंत्र का रामराज्य है . 


2.

उदास आँखों देखते हैं 

अँधा कुआँ, अथाह गहरा

और 

हुआँ हुआँ करते हैं .


हम वोटर, हम अनुचर, हम पब्लिक .


3.

एक लम्बी नींद में है 

तंत्र 

हमारे ख्वाब उसक

हमारा काम पिसना, पिस रहें हैं हम .

Friday, August 7, 2020

बंदा कमाल है 

क्या तो बेमिशाल है !

बंदी की 

मंदी की

और नज़रबंदी की 

खुद में धमाल है 

बंदा कमाल है। 


उसने कहा मान लो 

गाँठ बाँध जान लो 

सुनो वही गुनो वही

वह कहे धुनो वही 

हमने है मान लिया 

आँख बंद ठान लिया 

वह गले का हार है 

वही तारणहार है। 


उसके इशारें है 

यह जो नज़ारे हैं 

कहे वह धूप गीली 

सूरज पर चाँद बली 

उसने बताया है 

बाकी सब माया है 

उसके जो चार मित्र 

उनकी ही छाया है। 


भोंपूं गुलाम हैं 

चर्चा ये आम है 

झूठी यह बातें है 

सुनहली रातें हैं 

भूख प्यास रोज़गार 

बातें यह बेकार 

दुःख की कहानी है 

व्यर्थ है बेमानी है 

है वह विराजमान 

रखो उसका मान 

रोओ न चिल्लाओ तुम 

गान मंगल गाओ तुम 

पेट के भरने से 

स्वस्थ साफ़ रहने से 

देव का क्या नाता है 

उसे बस भाता है 

जय कहो जयगान करो 

तुम अफीमपान करो। 


श्रेष्ठ की न चाह करो 

बात यह गाँठ धरो 

हर दिन लड़ाई है 

उसने लगाई है 

तुम सिपाही होम  करो 

मन में ढाढ़स धरो 

तुम्हारा यह फ़र्ज़ है 

तुम पर क़र्ज़ है 

धर्म नाम डूब  मरो 

देश नाम लूट मरो 

तुम प्रजा वह राजा है 

दुंदुभि है बाजा है। 


होना उसका पर्व है 

बात बात गर्व है 

मर गया, गर्व है 

मार दिया, गर्व है 

मीलों पैदल, गर्व है 

वह उड़नछू, गर्व है 

भूख सहा, गर्व है

प्यास सही, गर्व है  

बंदी है, गर्व है 

मंदी है, गर्व है 

कांव कांव गर्व है 

गाँव गाँव गर्व है। 


देव है विधाता है राजा है त्राता है 

वह अवतार है। 

अबला है देश,

वह देश का भतार है। 





 



 





Thursday, August 6, 2020

तुम, तारणहार हो
स्वर्ग का द्वार हो 
धरती से छूटा नेह 
जदपि तुम निर्जल मेह 
तुझको सर्वस्व अर्पण 
धूम धाम से तर्पण  
रोज़गार दो या भूसी-चारा 
खोलूं मुंह जो, दो कारा
गाँव तेरे शहर तेरा 
नाम तेरा पुण्य मेरा 
तेरे  ही अखबार सारे 
तू ही बाज़ार तारे
भूख हो अकाल हो 
तेरा मायाजाल हो 
तेरी जय-जयकार है
ताज़ा माल डकार है 
तेरी मूंछें तेरी दाढ़ी 
मेरी मूर्छा नित् बाढ़ी
कीचण गुलाब है 
तेरा इक़बाल है 
दी हमें पहचान है 
झूठ नया ईमान है 
भुकमरी का नेवता है
तू हमारा देवता है
झूठ है फरेब है 
हिंसा, अतिरेक है 
तू कहे तो सब चंगा 
तू कठौती तू ही गंगा
वाद न संवाद है 
तेरा आशीर्वाद है।     
   
 
  

Sunday, August 2, 2020

तुम्हारा हुनर है, विजय।
तुम्हारी जय।

पूरा आकाश केवल तुम
खत्म हो रहा मैं क्रमशः।

तुम हो रौशन, भभक रहा मैं।

मेरे जलने के बाद 
बचा रहेगा जब अंधेरा केवल
लोग याद करेंगे तुमको।

तुम्हारी देन, मात्र अंधकार।

मसीहा!

न्याय का एक दिन तो आएगा
लिखी जाएंगी जब तेरी करतूतें।
तुम निबाह देती हो।

स्वीकार भाव में हिला देती हो सर,
कि नहीं कोई देव जो दिखता नहीं
और मन ही मन देव से मांग रही होती हो
सर्व शक्तिमानके नाराज़ न होने की मन्नत।
छिपा देती हो अखबार से काट
सहेजी नायक की कटिंग,
ख्वाब में अब भी जो मंडराता है।

सुन लेती हो मसीहा के लिए
तमाम कड़वे शब्द, 
मसीहा, जिसका होना ही है लोकतन्त्र।

तमाम किस्से हैं
तमाम बातें है
जिनसे निभा देती हो,
तुम
मोहब्बत मेरे लिए।

Thursday, July 30, 2020

दिन का विलोप हुआ,
रात उदास हुई।
अंधेरे में,
मेरे गीतों को सुना, सराहा तुमने।
मन भर जाने से पहले,
छेड़ देता हूँ मैं नए स्वर
नया खेल दर खेल नया
नए नए नामों से खेल नया।

जगमगाते हैं लैम्प पोस्ट नारंगी,
स्टूडियो से छन
आती है तुम्हारे लिए जगमाती लहरें,
बरसात के कीड़ों सम
तुम्हे पसन्द हैं मेरे लैम्प पोस्ट।
अच्छा लगता है मुझे, तेरा बहल जाना।

रात कुछ और उदास हो जब,
मैं रचता हूँ खेल कोई
तुम्हारे लिए, प्रिय जनता।
मैं मसीहा हूँ, अंधेरी उदास रातों का।

Tuesday, July 28, 2020

हमारी हार के चर्चों से भर लिया दामन,
जीत के बाद भी मशरूफ हो हराने में।
तुम्हारे तौर तरीके तो कुछ निराले हैं
हम ही हम हैं अब भी, तेरे फ़साने में।
हमारी हार के मानी खत्म हुए,
वायदे तेरे, निकले सभी नकली।
बल, साहस, उद्यम, रास्ते नए
झूठ तेरे, तेरी क्रूर हंसी बस असली।
बेशर्म स्थापनाओं के, तुम शहंशाह हो,
मसीहा, बन्द करो लचर आवारापन।
करो कुछ वह भी, जो करने आए हो,
दो अभागे देश को कुछ अपनापन।

Monday, July 27, 2020

1.
खुदा था, खुदाई थी
कारिंदा बन वो आए फिर,
राजे महाराजे,
हमने शीश नवाया।
तुम हो अभी,
हमारा मसीहा, खुदा का कारिंदा
किसी गलती किसी आक्षेप से परे।

2.
तुम हो, तुम्हारा सर्कस है
तमाशबीन भी, हम शामिल हैं।
खेल रहे हो तुम
जिससे, वह हम हैं। हम देश हैं।

3.
बिना अंत की हैं, यह कविताएं
तुम्हारे लिए रचित,यह प्रार्थनाएं
मसीहा हो तुम, तुम अनंत हो,
हम प्रजा हैं
भोग पाते हैं, केवल अपना अंत।

Sunday, July 26, 2020

तुम मसीहा हो,
चुना तुमने मज़बूत होना।

हम देश हैं
हमने चुना है तुम्हे
देश का मज़बूत नेता।

हमारे लिए आसान था यह,
बनस्पति
चुनना मज़बूत देश और तुम्हे नेता।

Saturday, July 25, 2020

1.
मौन भी, वाचाल भी
एक मेव हित उसका,
सत्ता।
अखण्ड सत्ता।

2.
निपट अकेले की,
चाहत का अंत नहीं।
अश्मेध, उसका यज्ञ,
हम, सहर्ष समिधा।

3.
सीने में ख़ंजर है,
ख़ंजर उसका, अपना सीना।
उसके निमित्त है, देश! तेरा जीना।

१. पूछो राम  कब करेगा  यह कुछ काम । २. कर दे सबको  रामम राम  सत्य हो जाए राम का नाम  उसके पहले बोलो इसको  कर दे यह कुछ काम का काम । ३. इतना ...