Tuesday, July 28, 2020

हमारी हार के चर्चों से भर लिया दामन,
जीत के बाद भी मशरूफ हो हराने में।
तुम्हारे तौर तरीके तो कुछ निराले हैं
हम ही हम हैं अब भी, तेरे फ़साने में।
हमारी हार के मानी खत्म हुए,
वायदे तेरे, निकले सभी नकली।
बल, साहस, उद्यम, रास्ते नए
झूठ तेरे, तेरी क्रूर हंसी बस असली।
बेशर्म स्थापनाओं के, तुम शहंशाह हो,
मसीहा, बन्द करो लचर आवारापन।
करो कुछ वह भी, जो करने आए हो,
दो अभागे देश को कुछ अपनापन।

No comments:

Post a Comment

मसीहा

१. कमाल है कि  तुम गंध नहीं पा रहे देख रहा हूं मैं  सड़ गया फ्यूचर। २. कमाल है कि  मसीहा तुम्हारा अब भी सुन रहा हूं मैं उसकी गालियां भद्दी। ३...