पहली बार दिल टूटने से भी ज्यादा,
ज्यादा, संतान को पीड़ा में देख उठने वाली पीड़ा से, इतना कि शब्द नहीं सूझ रहा
चन्द रोटियां बिखरी रेल लाइन पर,
इतना दर्द दे रही
जैसे मर गए हों।
मर जाने पर खुद के
हो उठता होगा, ऐसा दर्द।
१. कमाल है कि तुम गंध नहीं पा रहे देख रहा हूं मैं सड़ गया फ्यूचर। २. कमाल है कि मसीहा तुम्हारा अब भी सुन रहा हूं मैं उसकी गालियां भद्दी। ३...
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