छू नहीं सकता
अँधेरा कसैला
हृदय के गिर्द !
छू नहीं सकता
गले को छीलती
सांस अटकी !
छू नहीं पाता
निपट लिपटा दुःख !
१. कमाल है कि तुम गंध नहीं पा रहे देख रहा हूं मैं सड़ गया फ्यूचर। २. कमाल है कि मसीहा तुम्हारा अब भी सुन रहा हूं मैं उसकी गालियां भद्दी। ३...
satik baat
ReplyDeleteaapko man me kya chlta hai aur sharir uski pratikriya kaise deta hai khub pta hai...
dukh vvakyi aise hi lagta hai.
why so much negativeness only...
ReplyDeletethats the mood and topics which have surrounded me.
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