ख़त्म हुआ
भ्रम,
मिट गई
आशा,
अभिशप्त हैं पुनः जी उठने को।
बहाने मिल ही
जाते हैं
ठहाकों को मेरे।
२.
फिर से
हाज़िर हूँ हुज़ूर
आपके
दरवाज़े, खरीद लो
कुछ
मुस्कान।
१. समय के माप में, नाप रहे हम दूरी। समय निर्भर हमारी क्षमता पर क्षमता का विस्तार तुम तक, तुमसे दूरी क्षरण क्षमता का। २. न तरंग न पदार्थ रहे...
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