ख़त्म हुआ
भ्रम,
मिट गई
आशा,
अभिशप्त हैं पुनः जी उठने को।
बहाने मिल ही
जाते हैं
ठहाकों को मेरे।
२.
फिर से
हाज़िर हूँ हुज़ूर
आपके
दरवाज़े, खरीद लो
कुछ
मुस्कान।
१. कमाल है कि तुम गंध नहीं पा रहे देख रहा हूं मैं सड़ गया फ्यूचर। २. कमाल है कि मसीहा तुम्हारा अब भी सुन रहा हूं मैं उसकी गालियां भद्दी। ३...
No comments:
Post a Comment