रेशा रेशा
रंग
उघाड़ता रहा,
बेरंग कर
कहानी में, फिट करना चाहा,
कुछ दिन लिखी
कहानी, मैंने
अधुरा किया खुद को .
कहानी, अधूरी
रेशा रेशा
उघाडती
अब, मुझको
१. कमाल है कि तुम गंध नहीं पा रहे देख रहा हूं मैं सड़ गया फ्यूचर। २. कमाल है कि मसीहा तुम्हारा अब भी सुन रहा हूं मैं उसकी गालियां भद्दी। ३...
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