दो बार
कभी ज्यादा भी,
तलाशी लेने देता हूँ.
डर
हर वक़्त बना रहता है,
खौफ
चुभता है.
कमजोर, मेरी आँखों को
ज़रा तेज़ लगता है
मुंबई का धुआं,
१. कमाल है कि तुम गंध नहीं पा रहे देख रहा हूं मैं सड़ गया फ्यूचर। २. कमाल है कि मसीहा तुम्हारा अब भी सुन रहा हूं मैं उसकी गालियां भद्दी। ३...
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