उठ बैठी..गिनने लगती है पोरों पर समय,
नहीं
मरने का समय नहीं आया,
हिसाब कहता है .
लाश उठ बैठी
समय सवार है
गर्दन पर मेरे
१. कमाल है कि तुम गंध नहीं पा रहे देख रहा हूं मैं सड़ गया फ्यूचर। २. कमाल है कि मसीहा तुम्हारा अब भी सुन रहा हूं मैं उसकी गालियां भद्दी। ३...
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