Thursday, July 21, 2011

poems of delirium -6.

क्या पहना होगा 
तुमने 
पैरों में,
मेरी किरिच पे चलते हुए... 

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मसीहा

१. कमाल है कि  तुम गंध नहीं पा रहे देख रहा हूं मैं  सड़ गया फ्यूचर। २. कमाल है कि  मसीहा तुम्हारा अब भी सुन रहा हूं मैं उसकी गालियां भद्दी। ३...