Saturday, January 9, 2021

 1.

क़त्ल किया वक़्त का 

फिर जिया, 

शून्य में .


2.

तुमसे परे, मुझसे परे आदि अंत से परे 

शून्य में, 

जिया फिर .


3.

तुम घटे, हमसे

उपजा शून्य,

शून्य ही नियति अब . 






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