१.
तुम नहीं, कहीं भी मेरे भीतर
रखूं कहाँ,
दिल नहीं, कहीं भी मेरे भीतर।
२.
टीस नहीं, न दर्द कोई अब
पता है,
ज़िन्दगी आसान बहुत अब।
३.
मज़बूत बहुत, बहुत मज़बूत मन
दरक जाता,
अचानक, कोई अनचिन्हा मन।
१. कमाल है कि तुम गंध नहीं पा रहे देख रहा हूं मैं सड़ गया फ्यूचर। २. कमाल है कि मसीहा तुम्हारा अब भी सुन रहा हूं मैं उसकी गालियां भद्दी। ३...
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