Tuesday, June 23, 2026

ज़िन्दगी और मौत

१.
समय के माप में,
नाप रहे हम दूरी।
समय निर्भर हमारी क्षमता पर
क्षमता का विस्तार तुम तक,
तुमसे दूरी क्षरण क्षमता का।

२. 
न तरंग न पदार्थ रहे 
चले वक्र जब भी।
न तुम हो सके 
न बचा मैं 
मिले हम जब भी।

३.
बात, शोर, उलाहना 
मौन, चुप, बड़बड़ाना। 
खत्म बात को कर ज़िंदा
जिंदगी बुनती नई कड़ी 
मौत ख़त्म है संवाद का।







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