अंधे कवियों ने लिखी महान कविताएं
बहरे बीथोवेन ने सिम्फनी
कटे पैर लोग चढ़ जाते हैं पहाड़।
नागरिक चाहते हैं
राष्ट्र भक्त होना।
चाहते हैं,
न बदले कुछ भी
रटे हैं, विकल्पहीनता।
महान राष्ट्र यूं जन्म ले रहा है।
१. कमाल है कि तुम गंध नहीं पा रहे देख रहा हूं मैं सड़ गया फ्यूचर। २. कमाल है कि मसीहा तुम्हारा अब भी सुन रहा हूं मैं उसकी गालियां भद्दी। ३...
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