न ऊष्मा न विस्तार न तरल
प्रेमहीन बोझिल।
नहीं दे सकता हूँ
उष्णता संबंधों को,
उल्लास का आकाश,
संबंधों का उत्प्लावन
प्रेम की तरलता
धरा का आधार।
पंचतत्वहीन मैं
क्रियाहीन पड़ा हुआ
समझता न सोचता हूँ
व्यर्थ हो जाने का अनुभव आभास।
१. कमाल है कि तुम गंध नहीं पा रहे देख रहा हूं मैं सड़ गया फ्यूचर। २. कमाल है कि मसीहा तुम्हारा अब भी सुन रहा हूं मैं उसकी गालियां भद्दी। ३...
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