Tuesday, July 19, 2011

स्वप्न औ आग

पांच नहीं,
मेरे अवयव 
केवल  दो,

स्वप्न औ आग  
मेरी संरचना.

2 comments:

  1. बहुत ही अन्तर्मुखी पंक्तियाँ है...

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  2. jabardast hai bhai........... bilkul hi aap par aap dwara likhi kavita......

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फिर क्यूँ मैं हूँ.....

कितना जानें  कितना मानें  ख़ुद को कितना पहचानें । कहाँ रेफ है  सेफ़ कहाँ है  बीता कितना  बचा कहाँ है  कितना कच्चा-सड़ा हुआ है  मौत मौत है  ज...