बहुत ही अन्तर्मुखी पंक्तियाँ है...
jabardast hai bhai........... bilkul hi aap par aap dwara likhi kavita......
१. कमाल है कि तुम गंध नहीं पा रहे देख रहा हूं मैं सड़ गया फ्यूचर। २. कमाल है कि मसीहा तुम्हारा अब भी सुन रहा हूं मैं उसकी गालियां भद्दी। ३...
बहुत ही अन्तर्मुखी पंक्तियाँ है...
ReplyDeletejabardast hai bhai........... bilkul hi aap par aap dwara likhi kavita......
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