Thursday, July 14, 2011

मुंबई


चिकोटा
मसल कर देखा 
कुरेदता रहा चमड़ी 
नाख़ून उखाड़े 
फिर 
सड़क पर सर दे मारा

हर कोशिस की 
पुरजोर जार रोने की 

मुंबई 
मुझको रो लेने देती

एक हिजड़ा क्रोध 
लंगड़ी हिंसा 
लहू में बहती रही

धुआं धुआं रोष पी 
मैनें 
फिर आज मज़े में रोटी खाई..

मुंबई 
माफ़ करना 
मेरी कायरता को... 

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