Tuesday, March 29, 2011

दुःख २

दुःख का खुद में नहीं है महत्व

दुःख कर देता है सुन्न

सुख को बांटने , सुख को दिखाने
  सुख को पचाने के रास्ते बनाता आता है सुख

दुःख देता है जड़ता 
जड़ मन कर देता है
कलई दुःख की/ जीवन दर्पण में 
प्रतिबिम्बों के घेरे में दुःख ही दुःख 
साथी बनते है/ दुखी मन के 

Sunday, March 27, 2011

मै चाहता हु.3......

मै चाहता हूँ
चर्च न लिखे हमारी भूगोल पुस्तिका 

चर्च लिख  दे शायद 
धरती है चपटी

मै चाहता हु धरती रहे गोल हमेशा 
घूम फिर कर मिलने की गुंजाईश रहती है बाकी......

मै चाहता हु 2.....

मै चाहता हूँ 
 मृत्यु  आये न कभी  

ज़िन्दगी ठहरी हुई भी 
इंतज़ार करती है किसी विच्छोभ की

मृत्यु का आना इंतज़ार का कत्ल है

संभावनाओ की कल्पना
रोमांच की संभाव्यता है

मै चाहता हूँ 
अंत न हो संभावनाओ का.

मै चाहता हु

मै चाहता हूँ
बदल दू मुस्कान मोनालिसा 

चींख मारे चिग्घाड़  कर 
या हंस दे मुह बा कर
रहस्य आ कर सुलभ नहीं रहने देता मुस्कान

मै चाहता हूँ
मोनालिसा को अपनी जद में लाना .........