Saturday, September 3, 2016

जबकि मौन हो तुम
मैं पढ़ रहा हूँ, भाषा
उग आई दीवार इक, गिर पड़ी है।  तक़रीबन।

२.
जबकि शांत चुप चाप हो तुम
मैं गिन रहा हूँ, लहर
संयत स्वर में, रागिनी घुल गयी है। मधुर।

३.
अब जबकि  बेचैन हो तुम
मैं माप रहा, दूरी
परे समय के, रच रहे साथ हम। हरदम।    

Friday, June 5, 2015

पुनः पुनः

१. 
दिन ढला 
पुनः पुनः 
शाम से रात ही, समय का सफर। 

२. 

इंतज़ार 
पुनः इंतज़ार 
तुमसे मिलना ही, एकमेव ख्वाहिश। 

३. 

छपाक छपाक 
उम्मीदों का सफर 
तैरता मैं अंतहीन। 

Saturday, January 17, 2015

तुम्हारी कटान है या हीरे की आरी।

१. 
नशा ही नहीं,
खूबसूरत भी। 
अफीम है तो मज़ेदार।

२. 

इस पार से या उस पार से
परदा हटे तो 
दीदार भी हो। 

३. 

बहुत बारीक़ 
बहुत तेज़ 
तुम्हारी कटान है या हीरे की आरी। 

४. 

पसीना भी अच्छा 
फेरोमोन्स 
और स्वाद रंगीन। 

५. 

नमक इश्क़ का 
बेमुरौवत फीका 
चटक वासना की डली। 

Sunday, January 11, 2015

१. 

सिरों के परे, दिखती दुनिया विशाल,
सिरों  मध्य मैं झूला। 

२. 

अटक गया मध्य कहीं मैं,
ज़िन्दगी है कि डमरू कोई। 

३. 

दोनों छोर खुले  हुए 
कई कई छेदों से बजता मैं। 


Wednesday, December 24, 2014

नानी तुम नानी ही रहना।

मौसी मेरी बड़ी सयानी 
मौसी की मम्मी है नानी। 

मामा माँ बोले नानी को 
नानी बेटा बोले मुझको 
भाई हुआ जो मैं मामा का 
मामा बोलूं फिर मैं किसको। 

गड़बड़ झाला फिर ना करना 
नानी तुम नानी ही रहना। 


आओ खेले हम अब खेल

भैय्या देखो पापा आए 
राजू चाचा साथ हैं आए। 

चाचा के संग चाची आईं 
मुन्नी दीदी साथ है आई। 

मम्मी चाची करती मेल 
आओ खेले हम अब खेल। 

पापा कहते छोड़ो डॉल 
जाओ खेलो तुम फुटबॉल। 

Monday, December 22, 2014

जय जय भैय्या जय जय राम।

छत पर मेरे कौवे आते 
तरह तरह करतब दिखलाते। 

बोला मोटा कौवा एक दिन 
अच्छा नहीं लगता मेरे बिन 
बोला दुबला कौवा फिर 
लाओ खिलाओ दूध औ खीर। 

बोले कौवे सुबहो शाम 
जय जय भैय्या जय जय राम।