Sunday, September 29, 2013

इंतज़ार रहता है,

१. 

छुपा रह जाता है,
ख़त्म नहीं होता 
दर्द। 

२. 

नकली है, जीने की ललक 
इंतज़ार रहता है,
मौत तेरा। 

३. 

हम भी वाकिफ हैं 
तू भी तलबगार 
मिलेंगे शान से।  

Thursday, September 26, 2013

मौत होती रहती उम्र भर

१.

धडकन रुकती ही,
किसी एक पल 
मौत होती रहती उम्र भर

२.

मकसद नहीं, बेटी है ज़िन्दगी
मौत, नहीं इतनी भी उलझी।
सुलझी नहीं, भी ज़िन्दगी।

३.

हंसते हुए मिल सबसे
या चुपचाप अकेले
दिन अंतिम, कुछ सोचा नहीं अब तक।

४.

करीबी, सोचने नहीं देती।
मौत,
नहीं गलती मेरी, भूल जाता अक्सर तुझको।

५.

पता है,
चंद सिसकियाँ होंगी, होंगे चंद अफ़साने
मज़ा है, मरने में भी।

Tuesday, September 24, 2013

उदार हूँ, मौत तुझसे

१. 

मौत नहीं है
खुद, चुन न पाना साँसों का मतलब। 
मौत नहीं है 
देख, नहीं पाना ख्वाब कोई या ले पाना एक झपकी। 
मौत नहीं है 
सज जाना कब्रों की कतार में, बन एक शानदार मज़ार।  
 
मौत नहीं है, ये कविता। 

२. 

उदार हूँ, मौत तुझसे। 
उम्मीद नहीं, 
उदारता की तुमसे। 

३. 

अकेलापन, भी नहीं है मौत। 

Monday, September 23, 2013

नौकरी के चंद किस्से 2

१.

आवाज़ करे शोर
मद्धम जले लौ 
सांस बंद हो 
कुछ यही है, मांग तेरी। 
अफ़सोस,
फैले हैं, फेफड़े
जल रहा भभक मैं,
चुपचाप।  

२. 

पता है तुम्हे,कमी 
थोड़ी कैद की, लगनी है आज़ादी 
देखा है,
हालत अपने मुल्क की। 
पता है तुम्हे, सही 
रास्ते लग जाऊंगा मैं 
अंदाज़ा नहीं 
तुम हुए बुज़ुर्ग और मैं जवान हूँ। 




Sunday, September 22, 2013

तुम नहीं, कहीं भी मेरे भीतर

१.

तुम नहीं,  कहीं भी मेरे भीतर
रखूं कहाँ,
दिल नहीं, कहीं भी मेरे भीतर।

२.

टीस नहीं, न दर्द कोई अब 
पता है,
ज़िन्दगी आसान बहुत अब। 

३. 

मज़बूत बहुत, बहुत मज़बूत मन 
दरक जाता,
अचानक, कोई अनचिन्हा मन।  


Wednesday, September 18, 2013

घात , लगाए बैठे हैं सारे कौवे।


१. 

सड़ांध,
ऐसी समझ न आए 
बगल नाली की, बीट कौवे की या निज अस्मत की। 
समझ न आए, ऐसी 
सड़ांध,
अच्छी है, नाली, कौवे या खुद के लिए। 

२. 

भाई,
मत लौट के आना। 
घात ,
लगाए बैठे हैं सारे कौवे। 

३. 

दूब की इक डंठल
इतनी ही हरियाली।
ज़मीन से चिपक 
बच जा 
कौवों से। 




Tuesday, September 17, 2013

बंद हैं, दरवाज़े

१. 

खटखटा तो दूँ, 
दरवाज़ा 
तेरा, खुदा  
या खुद का। 
बंद हैं, दरवाज़े 
हम तीनो के। 

२. 

एक ही, सांकल 
छूटना है 
हमें।  
बस मौत आर पार है। 

३. 

तहखानो के 
खुले दरवाज़े,
तमाम ज़िन्न कैद जिनमें। 
बंद कर रखा है,
तहखानों को,
खुद के अन्दर। 





Friday, September 13, 2013

१.

कब मानोगे मरा
धड़कन रुके, मस्तिष्क ठप
या, पुतलियाँ हो ठंडी।
क्या कहोगे,
मर गयी हो चाह,
मरने की भी।

२.

बड़ा सवाल लेकिन
कब मानोगे जिंदा।

३.

सवाल है कि, ज़िन्दगी मौत से परे क्या।

४.

उलझन मेरी,
ज़िन्दगी बिना, मौत क्या संभव। 

जनतंत्र घरानों से परे..........


१.

जब भी,
बढ़ जाता है, मेरा रक्तचाप 
माफ़ी मांगने लगते हैं, नेहरु। 
काश,
वही एक गलती न करते आप 
काश,
जनतंत्र पनपता, घरानों से परे।

२. 
  कभी,
नज़र पड़ जाती है, मेरी 
शुक्रिया अदा कर देता हूँ। 
लंगड़ा हुआ, पर 
जिंदा है, मेरे देश में 
अभी भी, राज़ वोटों का। 






Thursday, September 12, 2013

चंद बातें नौकरी से.…

चंद बातें नौकरी से.… 

१. 

आज कल मेरा भी दिन है,
हर किसी का मुक़र्रर है, इक दिन। 

२. 

कुंकुआना औ भौंकना,
इतनी ही, भाषा मेरी। 

३. 

सफ़ेद मख्खन, काला स्वाद,
ज़िन्दगी, दुहरा मसाला।

४. 

बखूबी याद है, मुझे अपनी चीर फाड़,
नहीं दूजा अब, मुझसे बेहतर सर्जन।

५.

नहीं रही किसी को, मूछें
सवाल किसकी कितनी बड़ी पूँछ।  



Tuesday, September 3, 2013


1.

its depressing to be and doing nothing at all....
i am depressed to the core.............................

2.

its not the faith, nor the hope not even love,
best emotion to have, is 
ANGER...................................................

3.

no place for dreams..
time has come
to wake up...............