Wednesday, September 18, 2013

घात , लगाए बैठे हैं सारे कौवे।


१. 

सड़ांध,
ऐसी समझ न आए 
बगल नाली की, बीट कौवे की या निज अस्मत की। 
समझ न आए, ऐसी 
सड़ांध,
अच्छी है, नाली, कौवे या खुद के लिए। 

२. 

भाई,
मत लौट के आना। 
घात ,
लगाए बैठे हैं सारे कौवे। 

३. 

दूब की इक डंठल
इतनी ही हरियाली।
ज़मीन से चिपक 
बच जा 
कौवों से। 




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