
धडकन रुकती ही,
किसी एक पल
मौत होती रहती उम्र भर
२.
मकसद नहीं, बेटी है ज़िन्दगी
मौत, नहीं इतनी भी उलझी।
सुलझी नहीं, भी ज़िन्दगी।
३.
हंसते हुए मिल सबसे
या चुपचाप अकेले
दिन अंतिम, कुछ सोचा नहीं अब तक।
४.
करीबी, सोचने नहीं देती।
मौत,
नहीं गलती मेरी, भूल जाता अक्सर तुझको।
५.
पता है,
चंद सिसकियाँ होंगी, होंगे चंद अफ़साने
मज़ा है, मरने में भी।
मौत, नहीं इतनी भी उलझी।
सुलझी नहीं, भी ज़िन्दगी।
३.
हंसते हुए मिल सबसे
या चुपचाप अकेले
दिन अंतिम, कुछ सोचा नहीं अब तक।
४.
करीबी, सोचने नहीं देती।
मौत,
नहीं गलती मेरी, भूल जाता अक्सर तुझको।
५.
पता है,
चंद सिसकियाँ होंगी, होंगे चंद अफ़साने
मज़ा है, मरने में भी।
lagta hai revenue target poore nahi ho paa rahe .. isliye aisi sad poems likhi jaa rahi hain
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