Thursday, November 29, 2012

तुम्हारा साथ होना


1.

 तुम्हारा साथ होना,
 धुप का धीमा हो जाना है।
 हो जाना है, जंगल को सुन्दर।

2.

तुम्हारा साथ होना,
नींद का पूरा हो जाना है।
हो जाना है, पूर्ण ख़्वाबों का।

3.

तुम्हारा साथ होना है,
नीम बौर में खुशबू का आना है।
हो जाना है, रात चाँद को मनचला।       
 

Wednesday, November 28, 2012

त्रासदी भी यह अच्छी

1.

खुशकिस्मत था वह हाथ
जो रहा नहीं,
इससे पहले की, सहता विछोह।   

2.

ये इंतज़ार भी अच्छा
याद रहेगा,
ख़ुदकुशी से पहले ही ख़त्म हो गया।


3.

त्रासदी भी यह अच्छी 
खो गया मैं,
मिले हमें जब वापस तुम।

रात आधी

1.

एक रात काफी नहीं।
आधा प्याला, बचा हुआ,
ख़त्म होने को, आता नहीं।


2.

क्या वक़्त है, अभी बताओ तो। 
मरने से पहले या बाद का,
मुझे बोलना चाहिए या नहीं।


3.

रात आधी;
लिख सकते हो कविता
या कर सकते हो प्यार।       

1.

इक गुज़ारिश है,
सिरिअसली न लिया करो, मुझको।
कल को दोष मढ़ दोगे सब, मुझपर।  

2.

इक सलाह है,
ज्यादा सहेजा न करो, रिश्तों को।
बिखरना ही नियति, रिश्तों की।

3.

इक आदेश है,
देखना न समझना, मुझको।
कसूरवार कोई नहीं, मेरे लिए।    

      

कुछ इस तरह

1.

कुछ इस तरह,
बदला हो तेरा,
छोड़ दे तू 
नाराज़ होना।

2.

कुछ इस तरह,
प्यार करे तू,
भूल जाये तू,
जिसे प्यार करे।

3.

कुछ इस तरह,
बंटवारा खुशियाँ का,
चहरे तक  कभी, 
न पहुंचे गम तेरे। 
   

Friday, November 23, 2012

अबूझ ही हम अच्छे

1.

समझाना, तुम्हे लगता मुश्किल;
समझना, असंभव मुझको।
अबूझ ही हम अच्छे।

2.

कीमत जाती है, तेरे हिस्से से;
चुनता मैं, दर्द रवां करने के तरीके।
खरीद-भुगतान को इस तरह बांटा हमने।

3.

 किसी के जिम्मे न आए, तोहमत,
 दुसरे का कष्ट, न हो ज्यादा।
 इस कदर जिम्मेदारी, ढोते हम।      
  

 
   

डूबती कश्ती में, सवार हम

1.

मेजपोश, बिछी मेज़ पर
गर्द की पर्त बिछी, मेजपोश।
रिश्ते बिछा, सो गए हम।  

2.

जलावन की लकड़ी, घी  तली,
मज़े से जलते रहे।
ज़िन्दगी आज असली रंग में।

3.

अँधेरे औ उजाले के बीच,
डूब जातें हैं, ख्वाब जहां।
डूबती कश्ती में, सवार हम।







    

Thursday, November 22, 2012

आदि से अनंत तक, हम दोनों।

1.

उदासी रोती मुझ पर,
उदासी पर रोता मैं।
बन  गए, हम दोनों साथी।

 2.

चेहरे को ढक देता मैं,
नाम मिटा देते तुम।
हो गए, अनाम हम दोनों।

 3.

मेरा अंत नहीं होता,
तुम होते नहीं, दुबारा।
आदि से अनंत तक, हम दोनों।



   




Tuesday, November 20, 2012

मुझे आदत है, तेरे ठोकर की।

1.

समतल ज़मीन पर,
इक टुकड़ा पत्थर।
मुझे आदत है, तेरे ठोकर की।

2.

मिलना, मिलते रहना
मरने में मज़ा आ जाता है।

3.

डर कभी न था,
ज़िन्दगी तुझसे जुदा होने का।
अब प्यार भी नहीं करता, तुमको।





   




Thursday, November 8, 2012

मिलते हम


1.

मिलते हम,
तेज़ रोशनी, घुप्प अँधेरा 
दीख पड़ता नहीं, कुछ।
रोशनी,
छीन लेती 
तुमको, मुझसे।

2.

निर्वात, भारहीन 
मिलते मैं, तुम।
भार छीन लेता
तुमसे, मैं 
तुम, मुझसे 

3.

उंचाई 
अलग करती हमको,
गिरने का डर।
मुक्त, गिरते हुए,
मिलते हम।

Monday, November 5, 2012

तुम हो गए, मुक्त


तुम हो गए,
मुक्त 
भूल कर, मुझको 

बस साथ चलता रहा, 
मैं।

मुआफ़ न किया;
न भुला तुमको।

2.

हर हंसी बाद,
पैठी गहरी उदासी,
मौत आती है, आहिस्ता आहिस्ता 

3.


मुझे  याद नहीं,
मेरी इच्छाएं,
न पहली न आखिरी कोई,
मर गया क्या 
सचमुच मैं।   
 
4.

मेरा अंत, 
बता दो मुझको।

पता चले 
क्या अंत तक सहा तुमने, मुझको।

Monday, October 29, 2012

झाड झंखाड़ स्वप्न एक -- पार्ट टू

ख्वाब छलता हुआ,
चला आता है 
नींद झंझोड़े। 

बिखर जाने की, एक और परत बनती है
सोता जाता हूँ 
औ 
ख्वाब उगे आते हैं कन्धों से 
ख्वाब; पथरीले, लम्बे डैनों, नुकीले पंजों से 
नोच डालें हैं 
नींद मेरी,
मरती है धीमी मौत।

जलती आँखों 
ज़िन्दगी को निहारता मैं 
न हसरत, न लालसा कोई 
ख्वाब क़त्ल करते 
मेरा 
आहिस्ता आहिस्ता    


Tuesday, October 16, 2012

काटता है वक़्त

मनहूस मई  रात
खुद को मरा पाया उसने
हर रोज़,झखझोर खुद को देख लेता है
और रोज़ ही,
खुद को मरा पाता है,
काटता है वक़्त,
मौत को गिनते, बार बार  मारता है
हर बार ही, खुद को .

Thursday, October 4, 2012

झाड झंखाड़ स्वप्न एक .....01

उजाला बढ़ गया 
कल नींद साथ लाई,उजाला  
घनघोर उजाला
चमकदार, सफ़ेद, उजला, उजाला।
तुम पर साथ आ गए जैसे 
तुम आ ही गए साथ पर 
'आ गए जैसे' जैसी बात नहीं 
जैसे भरम हो मेरा 
तुम्हारे साथ ही आई एक परछाई, जैसे
 'जैसे ' कहना वाजिब है 
[न मेरे भरम का पता पक्का , न तेरे साथ की परछाई का ]
जैसे भरम हो मेरा ,तुम्हारे साथ ही,आई एक परछाई,जैसे 
लग पड़ी तुम गले मेरे,

और मै जलने लगा 

जलन से मेरे , जल न पाई परछाई 
अपने खुद से ढक रखा
छुपा रखा खुद से भी तुमने, परछाई 

चिपक  गई है तुमसे परछाई
नहीं कोई काम, मुझे परछाई से 
तुम  भी तो कहते हो, नहीं कोई काम तुमको, परछाई से 
पता नहीं मुझको
जगता कि सोता हूँ, खुद को ही छलता हूँ
देख देख खुद को ही,
जलता  दहकता हूँ
देख देख खुद को ही, हँसता हूँ,  हँसता हूँ 
अट्टहास 
हँसता हूँ 
हहाकर हँसता हूँ 
जलते हुए मुरख पर हंस कर बरसता हूँ 
हा हा हा हँसता हूँ 
झिम झिम बरसता हूँ,
भीगता नहीं हूँ 
तुम भीगते हो
नहीं भीगती है परछाई 

जलता बरसता हूँ 
हँसता हूँ 
अट्टहास 
    

Tuesday, August 28, 2012

डरना बेतरह, खुद के ख़त्म होने का 
और ख़त्म हो जाना फिर /
डर बेहतर था, 
खुद के ख़त्म हो जाने से 

Sunday, January 22, 2012

मन चाहता है

1.

 मन चाहता है
 नीँद, भर रात 
 ख्वाब मेँ तुम । 
मन चाहता है 
 दिन भर, तुम केवल ॥ 

2. 

मन चाहता है 
 इन्द्रधनुष 
 चमक का, तेरी 
 रंग ओ गंध, तेरे होने के 
 मन चाहता है 
 इर्द-गिर्द तेरे, मैँ लट्टू ॥


3. 

मन चाहता है  
ओरहीन नभ, उड़ान का मेरे 
जा जुड़े, छोर से तेरे  
मन चाहता है 
 उड़ू मैँ, लट तेरी ॥

Sunday, January 1, 2012

कार, मकान, प्रेमी


कई कई चाँद, सितारे अनेकानेक    
आँगन ऐसे, 
अक्सर अब तो।

फूल की गंध मिश्रित ,
कद्रदान,
 रंग कई  

शमाँ  औ परवाने 
भंवरा औ कलियाँ  
उपमान पुराने ये, 
शाश्वत / मतलब अपने .

एक शमा, परवाने कई 
भंवरा एक, कलियाँ कई...

ज्यादा और ज्यादा 
चाहिए और ज्यादा 
कार, मकान, प्रेमी