Sunday, January 22, 2012

मन चाहता है

1.

 मन चाहता है
 नीँद, भर रात 
 ख्वाब मेँ तुम । 
मन चाहता है 
 दिन भर, तुम केवल ॥ 

2. 

मन चाहता है 
 इन्द्रधनुष 
 चमक का, तेरी 
 रंग ओ गंध, तेरे होने के 
 मन चाहता है 
 इर्द-गिर्द तेरे, मैँ लट्टू ॥


3. 

मन चाहता है  
ओरहीन नभ, उड़ान का मेरे 
जा जुड़े, छोर से तेरे  
मन चाहता है 
 उड़ू मैँ, लट तेरी ॥

Sunday, January 1, 2012

कार, मकान, प्रेमी


कई कई चाँद, सितारे अनेकानेक    
आँगन ऐसे, 
अक्सर अब तो।

फूल की गंध मिश्रित ,
कद्रदान,
 रंग कई  

शमाँ  औ परवाने 
भंवरा औ कलियाँ  
उपमान पुराने ये, 
शाश्वत / मतलब अपने .

एक शमा, परवाने कई 
भंवरा एक, कलियाँ कई...

ज्यादा और ज्यादा 
चाहिए और ज्यादा 
कार, मकान, प्रेमी