Monday, September 5, 2011

समय का अंत नहीं,

हर सुबह,
जग कर लगता है
समय का अंत नहीं,

नस दिमाग की 
औ 
दिल सीने में  
हर सुबह, 
धडकते मिलते हैं .

6 comments:

  1. " दुहराता खुद को रोज,
    लौटता नहीं पर कभी...
    समझना कठिन जिसे,
    ...समय वही "

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  2. बहुत ही जीवंत विचार...

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  3. शुक्रिया सुषमा
    मनीष बहुत अच्छे

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  4. सागर बहुत बहुत शुक्रिया

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